झांसी। ग्रामीण युवाओं को समूह बना कर रोजगार दिलाने के लिए चलाई जा रही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना का संचालन कच्छप गति से हो रहा है। योजना के तहत गठित सभी समूहों के अभी तक खाते ही नहीं खुल सके हैं। स्थिति यह है कि जिनके खाते खुले हैं, उन सभी को रिवालविंग फंड भी नहीं मिल सका है।
जनपद में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना के तहत 834 समूह गठित किए गए हैं। मऊरानीपुर ब्लाक में 104, मोंठ में 95, बबीना में 113, बड़ागांव में 117, बामौर में 106, चिरगांव में 105, बंगरा में 99 व गुरसरांय ब्लाक में 112 समूह बनाए गए हैं। इनमें से 657 समूहों के ही खाते खुले हैं। खाते खुलने के बाद भी सभी समूहों को कार्य शुरू करने के लिए रिवालविंग फंड नहीं मिल सका है। महज 535 समूहों को ही फंड दिया गया है। मऊरानीपुर ब्लाक के 88, मोंठ के 47, बबीना के 38, बड़ागांव के 75, बामौर के 64, चिरगांव के 46, बंगरा के 66, गुरसरांय के 89 समूहों को ही रिवालविंग फंड दिया गया है। रिवालविंग फंड के रूप में प्रति समूहों को 15 हजार रुपये की राशि दी जाती है, जिससे वह अपना कार्य शुरू कर सकें।
पीएनबी समथर ने नहीं खोले खातेराष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना के तहत गठित समूहों के खाते पीएनबी समथर द्वारा नहीं खोले जा रहे हैं। समूहों के खाते खुलवाने के लिए एसडीएम मोंठ, बीडीओ मोंठ व पीडी डीआरडीए सहित विभिन्न अधिकारियों ने बैंक प्रबंधन से वार्ता की, लेकिन वार्ता सफल नहीं हो सकी। पीडी प्रहलाद सिंह ने बताया कि मामले को लेकर एलडीएम सुनील चावला से वार्ता की गई है। उन्होंने पीएनबी प्रबंधक को पत्र लिख कर खाते खोलने को कहा है। उन्होंने कहा कि यदि अब भी खाते नहीं खोले जाते तो इसकी शिकायत जिलाधिकारी से की जाएगी।