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माताटीला बांध पर गिर रहा बिजली का उत्पादन

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झांसी। माताटीला बांध में लगातार बढ़ती सिल्ट से 10- 10 मेगावाट की तीन जल विद्युत इकाइयों का उत्पादन गिरता जा रहा है। बांध से सिल्ट हटाने में करीब तीस हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जबकि इतनी राशि मिलना संभव नहीं है। ऐसे में उत्पादन इकाइयों की क्षमता कम होती जा रही है।
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साल 1964 में बेतवा नदी पर बने माताटीला बांध के पास विद्युत उत्पादन गृह बनाया गया था। यहां पर विद्युत उत्पादन के लिए दस- दस मेगावाट की तीन टर्बाइन स्थापित की गई थीं। बांध से पर्याप्त पानी मिलने पर तीनों टर्बाइनों से क्षमता के हिसाब से उत्पादन होता था। वर्ष 1983 - 84 में आई बाढ़ के बाद दो साल तक विद्युत उत्पादन नहीं हो सका था। इसके बाद से लगातार बिजली का उत्पादन गिरता जा रहा है। अभी तीनोें इकाइयों से आठ- आठ मेगावाट की उत्पादन हो पा रहा है।
इसका पहला कारण जल विद्युत परियोजना अधिकारियों को बिजली पैदा करने को जरूरी पानी के लेने के लिए सिंचाई विभाग पर निर्भर रहना है। पिछले कई सालों से बांध से सिंचाई व पेयजल के लिए पानी की खपत अधिक होने के कारण विद्युत उत्पादन गृह को पानी पहले की तुलना में काफी कम मिलने लगा। दूसरा कारण बांध में बढ़ती सिल्ट है। सिंचाई अधिकारियों की मानें तो 56 वर्षों में बांध में 15 टीएमसी सिल्ट जमा हो चुकी हैं। बांध की गहराई 1012 फीट है, जबकि टर्बाइन को पानी भेजने वालेपाइप 42 फीट नीचे 970 फीट पर लगे हुए हैं।
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बांध में जमा सिल्ट को हटाने में लगभग तीस हजार करोड़ रुपये का खर्चा आएगा। जबकि, इतनी राशि में नए बांध का निर्माण हो सकता है। इसके अलावा बांध में जमा सिल्ट को निकाल कर उसे एक स्थान पर रखा जाना भी सबसे बड़ी समस्या है। इन सब कारणों से जल विद्युत उत्पादन गिरता जा रहा है। वर्तमान में विद्युत उत्पादन गृह में तीस मेगावाट के स्थान पर मात्र 24 मेगावाट विद्युत का ही उत्पादन हो रहा है।
- सिल्ट के जमा होने से बांध की जल भराव क्षमता कम हो रही है। इससे विद्युत उत्पादन गृह को कम मात्रा में पानी मिल रहा है। इससे विद्युत उत्पादन प्रभावित हो रहा है। सालाना उत्पादन पर पांच से फीसदी तक अंतर आने लगा है। आगे यह समस्या और भी जटिल हो सकती है।
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रवींद्र यादव, अधिशासी अभियंता जल विद्युत उत्पादन गृह माताटीला।
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