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पटरियों के पास नहीं रहेंगे बिजली के खंभे

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आईटीआई के पास एचडीडी मशीन से पटरियों के नीचे से केबल डालने के लिए पाइप डालते कर्मचारी।
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झांसी। बीना से मथुरा के बीच तीसरी रेल लाइन का काम चल रहा है। इस ट्रैक पर अभी कई जगह आबादी क्षेत्र के लिए बिजली के खंभे लगे हैं। यह खंभे भविष्य में व्यवधान न बनें, इसके लिए सभी जगह अंडर ग्राउंड केबल डालने का काम शुरू हो गया है। शनिवार को एचडीडी मशीन से आईटीआई के पास अंडर ग्राउंड केबल के लिए पाइप डालने का काम किया गया।
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विगत अगस्त 2016 में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीईए) ने मथुरा से झांसी के बीच 273.80 किलोमीटर और झांसी से बीना के बीच 152.57 किलोमीटर की तीसरी रेल लाइन को मंजूरी दी थी। तीसरी नई रेल लाइन बिछाने में मथुरा-झांसी के बीच 4377 करोड़ और झांसी-बीना के मध्य 2490 करोड़ रुपये की लागत से काम चल रहा है। इसमें रेल विकास निगम लिमिटेड मथुरा से झांसी के बीच, झांसी से ललितपुर के बीच रेलवे का निर्माण संगठन और ललितपुर और बीना के बीच इंजीनियरिंग विभाग को नया ट्रैक डाल रहा है। तीसरी रेल लाइन के बीच कई बिजली के खंभे आ रहे हैं, जो ओएचई लाइन के ऊपर से पार कर रहे हैं। अथवा पटरियों के पास लगे हैं। चूंकि, तीसरी रेल लाइन बनने पर लंबाई ज्यादा हो जाएगी, ऐसे मेें पटरियों के ऊपर से केबल को गुजारना संभव नहीं होगा। इसलिए सभी खंभों को हटाकर पटरी से 40 मीटर दूर से अंडर ग्राउंड केबल डाली जा रही है।
शनिवार को एचडीडी मशीन से आईटीआई के निकट अंडर ग्राउंड केबल के लिए पाइप डालने का काम किया गया। राजस्थान के अजमेर से आई यह मशीन पटरियों के दस मीटर नीचे से 250 मीटर लंबाई तक छेद कर सकती है। छेद करने के बाद दो इंजी लोहे के पाइप डाल दिए जाते हैं, जिसमें से केबल को गुजारा जाता है। लोहे का एक पाइप तीन मीटर का होता है।
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