झांसी। बेसिक शिक्षा परिषद के नगर में अपने व किराए के कई विद्यालय भवन बेहद खस्ताहाल स्थिति में हैं। बरसात के मौसम में यहां स्थितियां बेकाबू हो जाती हैं। कई विद्यालयों में जलभराव हो जाता है तो कई में सीलन बनी रहती है। वहीं, कई तो ऐसे हैं जो ज्यादा बारिश नहीं झेल सकते और भरभराकर कभी भी ढह सकते हैं। ऐसे में इनमें पढ़ने वाले नौनिहालों की जिंदगी खतरे में है। इन भवनों को सुधारने व नवनिर्माण के लिए विभाग ने शासन से धनराशि मांगी है।
नगर क्षेत्र के कई परिषदीय स्कूलों में रंग रोगन के बाद भी दीवारों से उखड़ता चूना व प्लास्टर, छत से टपकता पानी, मोटी-मोटी पुरानी दीवारों पर मौजूद सीलन नजर आना आम है। कोतवाली जूनियर हाईस्कूल लक्ष्मीबाई, लाल स्कूल नई बस्ती, खिरक पट्टी प्राथमिक विद्यालय सहित कई विद्यालय भवनों में बरसात के दौरान स्थिति जटिल हो जाती है।
शिक्षक बताते हैं कि बरसात के दौरान विद्यार्थियों और उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कई मर्तबा स्थिति खतरनाक हो जाती है। विद्यालय भवनों में अमूमन मात्र दो कमरे होते हैं, जिनमें बरसात के दौरान बच्चों को अध्ययन कराना संभव नहीं होता है।
हालांकि इस संदर्भ में विभाग को कई बार अवगत कराया गया। लेकिन, कोई बदलाव नहीं हुआ। कमोबेश यही स्थिति किराए के भवनों में संचालित 19 परिषदीय स्कूलों की भी है। पुरानी नझाई प्राथमिक विद्यालय में विद्यार्थियों को बैठने भर के लिए ही पूरे शैक्षिक सत्र में संघर्ष करना पड़ता है।
विभागी अधिकारियों के मुताबिक जीर्ण शीर्ण हो चुके किराए के भवनों में संचालित कई स्कूलों को अन्य स्कूली भवनों में स्थानांतरित कर दिया गया है। इनमें प्रमुख रूप से खुशीपुरा बालक प्राथमिक विद्यालय को शिक्षा भवन स्थित बहुमंजिली भवन में, आर्य समाज कन्या व डरू भौंडेला प्राथमिक विद्यालय को शारदा सदन में, भैरव निकुंज को गुदरी प्राथमिक स्कूल में स्थानांतरित किया गया है। विभाग ने अपने स्कूली भवनों के निर्माण एवं जीर्णोद्धार के लिए शासन से धनराशि मांगी है।
इनमें प्राथमिक विद्यालय खिरकपट्टी के लिए पांच लाख 46 हजार रुपये, गढ़िया गांव कन्या प्राथमिक विद्यालय के लिए 3 लाख 26 हजार रुपये, लक्ष्मी बाई कन्या जूनियर हाईस्कूल के लिए 22 लाख 43 हजार रुपये, जूनियर हाईस्कूल नई बस्ती के लिए 21 लाख 53 हजार रुपये तथा प्राथमिक विद्यालय तालपुरा के लिए 27 लाख 66 हजार रुपये है। वहीं, इन स्कूलों के भवनों का सर्वे आरईएस द्वारा किया जा चुका है।
स्कूल के भवनों की मरम्मत के लिए हर वर्ष परियोजना कार्यालय धनराशि देता है। जो प्राइमरी में लगभग पांच हजार रुपये एवं उच्च प्राइमरी स्कूल के लिए साढे़ सात हजार रुपये। इस वर्ष विभाग के नगर क्षेत्र के स्कूली भवनों के मरम्मत के लिए डिमांड बीएसए से की गई है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में जल भराव से निपटने के लिए प्रशासन द्वारा मनरेगा से मिट्टी का भराव कराया जाएगा।
- जीएस राजपूत, एडी बेसिक
170 स्कूलों में हो जाता है जलभराव
यह जानकर हैरत होगी कि जनपद के 170 परिषदीय स्कूलों में बरसात के दौरान जल भराव का संकट विद्यार्थियों व शिक्षकों को झेलना पड़ता है, जो पिछले कई वर्षों से छाया हुआ है। इससे न सिर्फ बच्चों की पढ़ाई, शैक्षिक गतिविधियां बल्कि शासन-प्रशासन की तमाम योजनाएं भी प्रभावित होती हैं। हालांकि इस शैक्षिक सत्र में पहली बार प्रशासन जल भराव से निपटने के लिए मनरेगा से स्कूल परिसर में मिट्टी डाली जाएगी।
इसके लिए प्रशासन ने विभाग से जलभराव से जूझने वाले स्कूलों की सूची तलब की है। इनमें मऊरानीपुर में सर्वाधिक 58 परिषदीय स्कूल हैं। वहीं, बंगरा में 31, बड़ागांव में 12, गुरसराय में 4, मोंठ में 11, बबीना में 23, चिरगांव में 24 एवं नगर क्षेत्र में सात विद्यालय हैं। नगर क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालय भगवंत पुरा, यूपीएस कोछांभावर, प्राथमिक विद्यालय मैरी, प्राथमिक विद्यालय पिछोर, प्राथमिक विद्यालय राजगढ़, प्राथमिक विद्यालय करारी, प्राथमिक विद्यालय लहरगिर्द में जलभराव से परेशानी होती है।