life imprisonment in husband murder
झांसी। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश व न्यायालय संख्या आठ राधे मोहन श्रीवास्तव की अदालत ने पति की हत्या में पत्नी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। मात्र चार माह 13 दिन में ही अदालत ने फैसला सुनाया। पूरे मामले में मृतक के पुत्र व मृतक के पिता के बयान अहम माने गए।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रामकुमार पांडेय के अनुसार थाना बरुआसागर के गुरार गांव निवासी गोविंदादास ने 13 मार्च 2019 को थाने में प्रार्थना पत्र देते हुए बताया था कि उसका 35 वर्षीय पुत्र उत्तम उर्फ नन्ना कुशवाहा, पत्नी शीला देवी, पुत्र बंटी व करन के साथ मकान के ही एक भाग में अलग रहते थे। 12 मार्च 2019 की रात 8 बजे 12 वर्षीय नाती बंटी ने बताया कि 11 मार्च की रात करीब 12 बजे मां शीला ने पिता उत्तम को गर्दन मेें हंसिया मारकर व चिमटा गर्म करके जला दिया। इससे पिता की मृत्यु होने के बाद मां ने शव को बक्से के पीछे रख दिया। देखने पर जान से मारने की धमकी भी दी थी। जिससे डरकर दोनों भाइयों ने किसी को नहीं बताया। इसी बीच मां के घर से जाने के बाद जानकारी दी। बंटी के बताने पर घर के अंदर जाकर देखा तो उत्तम का शव बक्से के पीछे पड़ा था।