ऐतिहासिक लक्ष्मी ताल में सीवरेज पंपिंग स्टेशन (एसपीएस) 10 जुलाई से शुरू होगा। तालाब में गिरने वाले नालों का पानी इसी पंपिंग स्टेशन के माध्यम से तालाब के बाहर नारायण बाग रोड पर निकाला जाएगा, जिससे तालाब में गंदगी नहीं जाएगी।
लक्ष्मी तालाब को सुंदर बनाने पर 54 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। इसमें से साठ फीसदी पैसा (32.50 करोड़ रुपये) केंद्र सरकार और चालीस फीसदी (21.50 करोड़ रुपये) राज्य सरकार खर्च करेगी। तालाब को सुंदर बनाने का काम 2015 में शुरू हुआ था, जिसमें से अब तक 25 करोड़ रुपये का बजट मिल चुका है। दिल्ली की एक कंपनी को जल शोधन वाटर टैंक (एसटीपी) और अन्य निर्माण काम के लिए 34 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया है।
तालाब में सीवरेज पंपिंग स्टेशन बनाया गया है, जिससे सात नालों का पानी तालाब में जाने से रोका जाएगा। इससे तालाब में गंदा पानी नहीं जा पाएगा। पंपिंग स्टेशन की भंडारण क्षमता 580 किलोलीटर पानी की है। प्लांट शुरू हो जाने के बाद सात नालों का पानी एक टनल के जरिए अंदर आएगा। यहां पानी की अशुद्धियां दूर कर पानी टैंक में एकत्रित होगा तथा पाइप लाइन के माध्यम से लक्ष्मी ताल में जाएगा।
जल निगम के अधिशासी अभियंता नरेंद्र वर्मा ने बताया कि एसपीएस शुरू हो जाने से नालों का गंदा पानी तालाब में नहीं जा सकेगा, जिससे तालाब की सफाई करने में सहूलियत होगी।