छुट्टा जानवरों की समस्या यूं ही लाइलाज नहीं हो रही है, बल्कि इसके पीछे ऐसे लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जो दूध निकालने के बाद गाय को छुट्टा छोड़ देते हैं। नगर निगम छुट्टा जानवरों को पकड़ने का अभियान चला रहा है। बुधवार को सात जानवर पकड़े गए।
नगर निगम का कैटल कैचर दस्ता सुबह तीन बजे से छह बजे तक अभियान चलाता है। इसकी वजह सुबह के समय छुट्टा जानवर बैठे होते हैं और सड़कें खाली रहती हैं। जानवरों को पकड़ने के दौरान वे इधर - उधर भागते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका रहती है। इसीलिए सुबह जब सन्नाटा रहता है, तब जानवरों को पकड़ा जाता है। छुट्टा जानवरों में सांड और गायें रहती हैं। गायों में सर्वाधिक संख्या ऐसे लोगों की गायों की होती है, जो गाय का इस्तेमाल केवल दूध निकालने तक करते हैं। गायों के भोजन और उन्हें बांधकर सेवा करने की चिंता उन्हें नहीं रहती, क्योंकि दिन भर गायें शहर में छुट्टा घूमती हैं। इसमें सर्वाधिक गायें तालपुरा क्षेत्र में रहने वालों की हैं। यह लोग अपनी गायों को सब्जी मंडी में छोड़ जाते हैं, जहां दिन भर उनके खाने का इंतजाम रहता है। यानी मुफ्त में उन्हें गाय का दूध मिल रहा है।
उधर, बृहस्पतिवार की शाम साढ़े चार बजे महारानी लक्ष्मीबाई पार्क के सामने दो सांडों की भिड़ंत हो गई। करीब पौन घंटे तक दोनों सांड पार्क से लेकर चंदा होटल के बगल वाली सड़क पर काफी दूर तक सींगों से झूमा-झटकी करते रहे। स्थिति यह बनी कि एक सांड का खून निकल आया। थक जाने के बाद सांड खुद व खुद शांत हो गए।
सीपरी बाजार कारगिल पार्क के पास निवासी अमोद नायक ने बताया कि उनके क्षेत्र में सांडों का झुंड रहता है। मंगलवार की देर शाम सड़क पर आधे घंटे तक सांड बेलगाम दौड़ते रहे, जिससे अफरातफरी मची रही। पशु चिकित्साधिकारी डा. आरके निरंजन ने बताया कि बुधवार को नगर निगम के दस्ते ने रानी महल, इलेक्ट्रानिक्स मार्केट और सुभाष गंज में अभियान चलाया। तीन घंटे में सात सांडों को पकड़कर बेतवा नदी के किनारे छोड़ दिया गया।