झांसी। निर्माणाधीन एरच बांध का काम समय पर पूरा न होने से उसकी लागत बढ़कर दो गुने से अधिक हो गई। शासन के निर्देश पर सिंचाई विभाग ने दोबारा बांध की लागत को पुनरीक्षित कराया। इससे 600 करोड़ की शुरूआती लागत से बढ़कर बांध की लागत करीब 1400 करोड़ रुपये पहुंच गई। इसी बांध से डिफेंस कॉरिडोर, जल जीवन मिशन योजना समेत गरौठा के सूखा ग्रस्त इलाके को पानी दिया जाना है। इसको देखते हुए सिंचाई विभाग ने पुनरीक्षित प्रस्ताव तैयार किया है। यह प्रस्ताव शासन को भी भेज दिया गया। माना जा रहा है कि लेटलतीफी के कारण बांध की लागत 800 करोड़ बढ़ गई है।
पिछले चार साल से जांच में उलझी होने से एरच बांध परियोजना अब काफी पिछड़ चुकी है जबकि सरकार परियोजना पर चार सौ करोड़ रुपये से अधिक खर्च कर चुकी। अब जब डिफेंस कॉरिडोर एवं हर घर जल योजना के लिए पानी की जरूरत महसूस हुई तब इस बांध परियोजना को फिर ठंडे बस्ते से बाहर निकालने की कवायद शुरू हुई है। शासन ने बांध की लागत को पुनरीक्षित करने का निर्देश दिया। इसके बाद सिंचाई विभाग ने पुनरीक्षित कराने का काम किया। सिंचाई अफसरों के मुताबिक जमीन की लागत बढ़ने के साथ ही जीएसटी एवं टैक्स पर 18 प्रतिशत राशि अलग से देनी पड़ रही है।
इस वजह से अब बांध की कुल लागत बढ़कर करीब 1400 करोड़ हो गई। मुख्य अभियंता राजपाल सिंह का कहना है बांध का निर्माण फिर से आरंभ कराने संबंधी फैसला शासन को करना है। प्रस्ताव मांगा गया था, जिसे शासन को भेज दिया गया है।
बांध से सात लाख लोगों को फायदा
प्रस्तावित बांध परियोजना से करीब सात लाख लोगों को फायदा होने की उम्मीद है। बांध परियोजना की शुरूआत वर्ष 2015 में पारीछा से चालीस किलोमीटर नीचे एरच के जुझार गांव में हुई थी। 600 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना में 62 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) पानी स्टोर होना था। इसमें 29 एमसीएम पीने और 9.50 एमसीएम पानी सिंचाई के लिए तय हुआ। शेष पानी को डिफेंस कॉरिडोर और हर घर जल योजना एवं पावर प्रोजेक्ट में भी देना था।
अनियमितताओं के चलते चार साल से ठप पड़ा काम
बांध परियोजना पर कुल करीब 401 करोड़ खर्च किए जा चुके लेकिन, वर्ष 2018 में अनियमितताओं के कई आरोपों के चलते सरकार ने निर्माण कार्य पर रोक लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी थी। इसके बाद से प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया। जांच आरंभ हुए करीब चार साल से अधिक समय बीत चुका लेकिन, जांच अभी तक पूरी नहीं हो सकी।