लंबे दांपत्य के लिए किया था विघ्नहर्ता के समक्ष विवाह
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झांसी। मनु एवं गंगाधर राव के विवाह स्थल के लिए गणेश मंदिर का चयन भी ऐसे ही नहीं हो गया, बल्कि इसके लिए भी राज परिवार एवं उनके अति विश्वास पात्र सिपहसलारों में लंबी मंत्रणा हुई। पहली पत्नी के निधन से झटका खाए गंगाधर राव को सभी ने सलाह दी कि लंबे दांपत्य जीवन के लिए गणेश मंदिर में ही विध्नहर्ता के समक्ष मनु से विवाह करें।
नयनतारा देसाई द्वारा लिखित मराठी पुस्तक रण रागिणी में विवाह अवसर के कई प्रसंगों का विस्तृत वर्णन है। गंगाधर राव के विवाह का मुहूर्त घोषित होते ही किले के राजमहल में रंग रोगन प्रारंभ हो गया। इस दौरान राज परिवार एवं अति विश्वस्त जनों की बैठक में गंगाधर राव से निवेदन किया गया कि वह अपनी शादी गणेश मंदिर में करें। इस पर गंगाधर राव ने आश्चर्य प्रकट करते हुए कहा कि राज परिवार को यह शोभा नहीं देगा कि राजा की शादी मंदिर में हो। श्रीमंत बाजीराव हंसेंगे। तब उनके विश्वासी जनों ने पुन: कहा आपका पहला विवाह राज महल में हुआ और रमाबाई (पहली पत्नी) जल्द स्वर्गवासी हो र्गइं। इसलिए विघभनहर्ता गणेश के समक्ष विवाह करें। इस मत को आदर देकर गंगाधर राव ने सहर्ष सहमति दे दी।
इसके पश्चात मंदिर को सजाया गया। मंदिर के ठीक सामने आलीशान शामियाना खड़ा किया गया, ताकि मेहमान बैसाख की तपती गर्मी से बच सकें। गणेश मंदिर के प्रवेश द्वार के दोनों ओर पुष्प माला लिए चांदी के हाथी की प्रतिमाएं एवं मंदिर परिसर के अंदर सोने के वंदनवार लगाए गए।
मंदिर के समीप ही ठहरा था मोरोपंत परिवार
महाराष्ट्र गणेश मंदिर कमेटी के सचिव गजानन खानवलकर के मुताबिक रानी एवं उनके पिता मोरोपंत के परिवार को मंदिर के सामने स्थित बाडे़ में ठहराया गया था, जो संभवत: दुर्गाबाई की हवेली मानी जाती है। इसी दौरान रानी ने पहली बार यहां गंगाधर राव को देखा था।