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लक्ष्मी ताल का ‘वाटर डेड’

Wed, 22 Mar 2017 01:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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लक्ष्मी ताल का ‘वाटर डेड’ - फोटो : demo
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लक्ष्मी ताल का पानी गंदगी के कारण खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इसे ‘डेड वाटर’ की श्रेणी में रखा है। स्थिति यह है कि यह पानी जलीय जीव-जंतुओं के लिए भी घातक हो गया है। इतना ही नहीं, ताल के गंदे पानी से आसपास के क्षेत्रों का भूगर्भ जल भी दूषित हो गया है, जिसका खामियाजा बड़ी आबादी को भुगतना पड़ रहा है।  
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पानी के अच्छे स्वास्थ्य के लिए उसमें टोटल कोलीफॉर्म ऑर्गनिज्म (टीसीओ) की मात्रा 100 मिलियन पार्ट प्रति लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए, लेकिन लक्ष्मीताल के पानी का टीसीओ 28,000 मिलीयन पार्ट प्रति लीटर पर पहुंच गया है। इतना ही नहीं, जलीय जीव-जंतुओं के लिए पानी में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) की मात्रा शून्य होनी चाहिए, लेकिन ताल में यह 85 मिलीग्राम प्रति लीटर है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा की गई पानी की जांच में यह आंकड़े सामने आए हैं। यह स्थिति ताल में बेतहाशा रूप से गंदगी जमा होने से पैदा हुई है। शहर के पांच नालों का गंदा पानी ताल में लगातार गिर रहा है, जिससे पानी का यह प्राचीन स्रोत गंदे पानी के डंपिंग यार्ड में तब्दील होकर रह गया है। 
ताल का पानी प्रदूषित होने से इसमें कछुआ, मछली समेत अन्य जीव-जंतु पनप नहीं पा रहे हैं। इतना ही नहीं, इसका असर आसपास के इलाकों के भूगर्भ जल पर भी पड़ रहा है। हैंडपंप और बोरिंग से प्रदूषित पानी निकल रहा है। कुओं का पानी भी खराब हो गया है। इससे शहर क्षेत्र की बड़ी आबादी को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बावजूद, ताल के पानी की सफाई के लिए धरातल पर प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। सालों से सिर्फ कागजी घोड़े ही दौड़ रहे हैं।   
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गंदा पानी गिरने से रोकना होगा
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा समय-समय पर लक्ष्मी ताल के पानी की जांच की जाती है, जिसमें प्रदूषण की मात्रा सामान्य से कहीं अधिक पाई गई है। बचाव के लिए इसमें गंदा पानी गिरने से रोकना होगा। साथ ही सफाई कराना भी जरूरी है। 
- निरंजन शर्मा, प्रभारी क्षेत्रीय अधिकारी- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड 

बोरिंग से निकल रहा प्रदूषित जल 
ताल से सटी कालोनी ओम शांति नगर शहर की पॉश कालोनियों में एक मानी जाती है। ताल के प्रदूषण की वजह से इस कालोनी के पानी का भूगर्भ जल भी बुरी तरह से प्रदूषित हो गया है। इस लेकर अमर उजाला ने कालोनी के निवासियों से बातचीत कर उनकी परेशानी जानी। 

जाम हो जाती है पाइप लाइन 
बोरिंग में भी बेहद गंदा पानी आता है। स्थिति यह है कि गंदे पानी से प्रत्येक छह-सात महीने के बाद घर की पाइप लाइन भी जाम हो जाती है, जिसे एसिड के जरिये साफ कराना पड़ता है। चूंकि, जल संस्थान से लिए गए कनेक्शन में पर्याप्त पानी नहीं आता है। मजबूरी में भूगर्भ जल का इस्तेमाल करना पड़ता है।  - प्रीति शर्मा 

मच्छरों का प्रकोप भी ज्यादा 
ताल के पानी अब कीचड़ में तब्दील हो गया है। इसके ठहरे रहने की वजह से इसमें बेतहाशा रूप से मच्छर पनप रहे हैं, जिससे कालोनी में भी मच्छरों का भारी प्रकोप रहता है। गर्मी के मौसम में और भी बुरी स्थिति हो जाती है। पानी से सड़ांध आने लगती है, जो घर के भीतर तक पहुंच जाती है। - अशोक सेन 

अब होना चाहिए काम 
लक्ष्मी ताल की सफाई की बातें तो हम सालों से सुनते आ रहे हैं, लेकिन काम कुछ भी नहीं किया जा रहा है, जिससे हालात बदतर होते जा रहे हैं। केंद्र और प्रदेश में अब भाजपा की सरकार है। ऐेसे में अब काम न कराने का ठीकरा सरकारें एक-दूसरे पर नहीं फोड़ सकती हैं। अब प्रभावी कदम उठाने होंगे। - दिनेश टकसारी  

आरओ भी छोड़ देते हैं साथ 
कालोनी के हर घर में आरओ लगा है। लेकिन, भूगर्भ जल गंदा होने से यह यह आरओ भी सुचारु रूप से काम नहीं करते हैं। गंदगी जमा होने से यह छह महीने में ही जाम हो जाते हैं, जिससे मेमरेन बदलवाना पड़ता है। सरकार को ताल की सफाई कराकर इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना चाहिए। - दीपाली घोष 
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