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कुत्तों का वार, रोज सौ शिकार

Fri, 08 Dec 2017 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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dog, jhansi news - फोटो : demo
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एक बार फिर आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ गया है। जिला अस्पताल में रोज लगभग सौ मामले कुत्ते के काटने के आ रहे हैं। हालत यह है कि जिला अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन खत्म हो गए तो उरई से उधार लेने पड़े। खास बात यह कि सिर्फ 21 लोगों ने कुत्ता पालने का लाइसेंस नगर निगम से लिया है, जबकि हकीकत यह है कि सैकड़ों पले हैं।
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शहर को स्मार्ट बनाने के लिए काम शुरू होने वाला है। इसलिए अब यहां के लोगों को भी स्मार्ट बनना होगा। अन्य महानगरों की तरह यहां पर भी कुत्ते पालने के शौकीन तो हैं, लेकिन बिना लाइसेंस बनवाए ही कुत्ता पाल रहे हैं। स्थिति यह है कि अभी महज 21 लोगों ने ही पालतू कुत्ता का लाइसेंस बनवाया है, जबकि कुत्ता पालने वालों की संख्या हजारों में है। ऐसा भी नहीं है कि कुत्ता पालने का लाइसेंस बनवाने की फीस बहुत ज्यादा हो। केवल एक साल के लिए 25 रुपये फीस है। गाय, भैंस व बकरियां पालने का लाइसेंस बनवाना अनिवार्य है। इसके विपरीत गायें छुट्टा घूम रही हैं और डेयरी फार्म में बिना लाइसेंस के भैंसें पाल कर दूध का कारोबार हो रहा है। गंदगी फैलाने की शिकायतें मिलने पर अब दूध डेयरी संचालकों का चालान किया जा रहा है।

शहर में आवारा घूम रहे कुत्ते आए दिन लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. बीके गुप्ता का कहना है कि पिछले दो-तीन महीने में कुत्ता काटने के मामले बढ़े हैं। जिला अस्पताल में रोजाना करीब सौ मरीज पहुंच रहे हैं। मरीजों की बढ़ी हुई संख्या की वजह से स्थिति यह है कि अस्पताल में कुत्ता काटने के इंजेक्शनों का टोटा हो गया है। काम चलाने के लिए उरई से चार सौ इंजेक्शन उधार लिए गए हैं।
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ऐसे बढ़ सकती है लाइसेंस फीस
गाय भैंस व बकरी पालने की लाइसेंस फीस एक साल के लिए 10 रुपये है। आज के समय के हिसाब से बहुत कम है। यदि पार्षद सदन में सर्वसम्मति से फीस बढ़ाने का प्रस्ताव पारित कर दें और शासन उसको स्वीकृति दे दे तो लाइसेंस फीस बढ़ जाएगी। यह फीस 1998 में तय की गई थी। आज के समय में लाइसेंस फीस बढ़ानी बहुत जरूरी है। इससे नगर निगम की आय बढ़ेगी।

सड़क पर गंदगी रोकें
कुत्ता पालने वाले ज्यादातर लोग कुत्ते को घुमाने को ले जाते हैं, सड़क पर कुत्ता गंदगी करता है। इससे सड़कों पर बेवजह की गंदगी फैलती है। कुत्ता पालने वालों को स्वयं इस बात के लिए जागरूक होने की जरूरत है कि सड़क पर गंदगी न कराएं। गायें छुट्टा घूमती हैं। दूध डेयरी चलाने वाले भैंसें पालते हैं। उनकी गंदगी नालियों में बहती है।

आवारा कुत्तों की नसबंदी का काम ठप
शहर में सात हजार से अधिक आवारा कुत्ते हैं। इनकी आबादी न बढ़े, इसलिए नगर निगम ने आवारा कुत्तों की नसबंदी करने का अभियान शुरू किया था। कुत्तों की नसबंदी के लिए बिजौली में आपरेशन थियेटर तैयार है, लेकिन ठेकेदार ने काम बंद कर दिया है। इसलिए अब नए सिरे से काम शुरू कराया जाएगा।

लाइसेंस के लिए ये दस्तावेज जरूरी
यदि आपको पालतू कुत्ते का लाइसेंस बनवाना है तो इसके लिए आधार कार्ड, कुत्ते का फोटोग्राफ, उसकी उम्र, उसकी बतानी होगी। लाइसेंस के लिए नगर निगम में पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है।


इनका चालान किया
नगर निगम ने गोदूं कंपाउंड मे राजेंद्र कुमार यादव, कालीचरन यादव और पंचवटी मोहल्ला में भज्जू पाल का चालान किया है। अब अदालत इन पर जुर्माना लगाएगी।

दूध डेयरियों को शहर से बाहर किया जाएगा
दूध डेयरी संचालकों को शहर से बाहर किया जाएगा, क्योंकि डेयरियों के आसपास की नालियों में बहुत गंदगी बहती है। इसलिए शासन ने इन्हें शहर से बाहर करने के निर्देश दिए हैं।


शुरू हो गए चालान
जो व्यक्ति भी कुत्ता पाले हैं, वह लाइसेंस बनवा लें। फीस बहुत मामूली है। स्मार्ट सिटी का दर्जा मिल गया है, अब लोगों को स्वयं जागरूक होना चाहिए। लाइसेंस नहीं बनवाने वालों का चालान किए जा रहे हैं।
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- डा. आरके निरंजन
पशु चिकित्साधिकारी
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