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Jhansi News: पांच साल में एक भी कुष्ठ रोगी नहीं हुआ विकलांग

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झांसी। जनपद में पिछले पांच सालों में एक भी कुष्ठ रोगी में विकलांगता नहीं आई है। मौजूदा समय में यहां पर 82 सक्रिय कुष्ठ रोगी हैं। इनमें अप्रैल 2023 से अब तक 80 मरीज मिले हैं। कुष्ठ रोग का इलाज सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध है।
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कुष्ठ रोगी के हाथ-पैरों की परिधि, तंत्रिका, त्वचा, नाक की म्यूकोसा और श्वसन तंत्र के ऊपरी हिस्से में लाल चकत्ते हो सकते हैं। सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने बताया कि शुरू में एक-दो धब्बे से ये रोग शुरू होता है। इलाज न कराने पर ये बढ़ता जाता है। गंभीर स्थिति होने पर हाथ-पैरों में विकलांगता हो सकती है। उन्होंने कहा कि कुष्ठ रोग छूने से नहीं फैलता है। बल्कि, संक्रमित व्यक्ति जब खांसता या छींकता है तो इसके बैक्टीरिया स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। समय पर मल्टी ड्रग थेरेपी के उपचार कराने पर ये रोग ठीक हो सकता है। सभी सरकारी अस्पताल में इसकी दवा उपलब्ध है। कुष्ठ रोगियों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन अभियान के तहत 30 जनवरी से स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ. महेंद्र कुमार ने बताया कि कुष्ठ रोगी से भेदभाव न करें और न ही किसी प्रकार के अंधविश्वास या अफवाह में पड़ें। अब तक 43 कुष्ठ रोगी ठीक हो चुके हैं।
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ये हैं लक्षण
- शरीर पर हल्के लाल चकत्ते या निशान होना
- इन निशानों में सुन्नपन अथवा कोई संवेदना न होना
- ये धब्बे शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकते हैं
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