झांसी। बोर्ड परीक्षाएं नजदीक हैं और हाईस्कूल, इंटरमीडिएट के कई छात्र-छात्राओं में एग्जाम फोबिया यानी परीक्षा का डर घर कर गया है। हाल ये है कि किसी की रात की नींद उड़ गई गई तो कोई परीक्षा छोड़ने की जिद पर अड़ा है। जब परिजन बच्चे को समझाने की कोशिश करते हैं तो छात्र घर में तोड़फोड़ करना शुरू कर देते हैं। कइयों की भूख तक लगनी बंद हो गई है।
परीक्षा की घड़ी जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे कई छात्र-छात्राओं के तनाव का ग्राफ भी बढ़ता जा रहा है। इन दिनों मनोचिकित्सकों के पास रोजाना दो से चार केस ऐसे पहुंच रहे हैं, जो परीक्षा को लेकर बहुत डरे हैं। छात्रों को ये डर है कि वह बोर्ड परीक्षा में अच्छे नंबर नहीं ला पाएंगे। उनका आत्मविश्वास डगमगा गया है। दिन भर घबराहट और बेचैनी रहती है। कुछ भी खाने-पीने का मन नहीं करता है। कई विद्यार्थी जरा सी बात पर रोने लगते हैं। कई छात्र तो परिजनों से कह रहे हैं कि वो परीक्षा में बैठेंगे ही नहीं। फिर से उसी कक्षा में प्रवेश लेकर अगले साल परीक्षा में बैठेंगे। जब परिजन बच्चों से पढ़ाई करने या परीक्षा देने की जिद करते हैं तो कई छात्र-छात्राओं का गुस्सा फूट पड़ता है। वह घरों में तोड़फोड़ से लेकर परिजनों से भी दुर्व्यवहार कर रहे हैं। परिजन बच्चों की काउंसलिंग मनोचिकित्सकों से करा रहे हैं। डॉक्टर परिजनों से बच्चों को आराम से समझाने और दबाव न बनाने की सलाह दे रहे हैं। कइयों को दवाओं की भी जरूरत पड़ रही है।
कइयों में ये लक्षण दिखते
- चक्कर आना
- सिर दर्द होना
- पढ़ाई पर फोकस न करना पाना
- दिल की धड़कन तेज हो जाना
- हाथ-पैरों में कंपन शुरू होना
केस-1
एक सप्ताह से सही से सोई नहीं छात्रा
जिला अस्पताल की मनोचिकित्सक के पास दो दिन पहले एक ऐसी छात्रा को परिजन लेकर पहुंचे, जो एक सप्ताह से सही से सोई नहीं है। वह कह रही है कि 12वीं की परीक्षा नहीं देगी। जबकि, वह मेधावी छात्रा है और 11वीं में उसके 85 फीसदी अंक आए थे। डॉक्टर ने उसे दवाएं देकर दो दिन बाद बुलाया है।
केस-2
इस बार नहीं अब अगले साल दूंगा परीक्षा
सीपरी बाजार निवासी दसवीं का छात्र अगले साल परीक्षा देने पर अड़ा हुआ है। वह परिजनों से कहता है कि परीक्षा देने पर उसके अच्छे नंबर नहीं आ पाएंगे। कई बार उसके हाथ-पैर भी सुन्न पड़ जाते हैं। छोटी सी बात पर वह रोने लगता है। अभी उसका मनोचिकित्सक से इलाज चल रहा है।
केस-3
मां बोली-पढ़ाई करो तो घर पर कर दी तोड़फोड़
आवास विकास निवासी 12वीं के छात्र की हाल ही में प्री बोर्ड परीक्षा संपन्न हुई है। मगर वह परीक्षा के दौरान पढ़ाई नहीं कर रहा था। परिजनों ने जब उससे पढ़ाई करने के लिए कहा तो उसने तोड़फोड़ कर दी। बोला कि पढ़ाई में मन नहीं लगता है। उसकी मनोचिकित्सक ने काउंसलिंग की।
वर्जन..
परीक्षा को लेकर डरे हुए करीब 25 छात्र-छात्राओं की काउंसलिंग पिछले एक सप्ताह में कर चुकी हूं। इसमें कई छात्र परीक्षा छोड़ने की बात कर रहे हैं। कुछ सो नहीं पा रहे, तो कुछ घर पर तोड़फोड़ और परिजनों से दुर्व्यवहार कर रहे हैं। इस समय परिजन बच्चों पर दबाव न बनाएं। उन्हें आराम से समझाएं। - डॉ. शिकाफा जाफरीन, मनोचिकित्सक, जिला अस्पताल।
पिछले एक सप्ताह से एग्जाम फोबिया वाले कई छात्र-छात्राओं को उनके परिजन दिखाने के लिए लेकर आए हैं। ऐसे बच्चों के स्वभाव में चिड़चिड़ापन, किसी से बात न करना, अकेले रहना, सही से खाना पीना न खाना, स्वभाव में उग्रता आदि देखने को मिल रही है। एक सप्ताह में 10-12 बच्चों की काउंसलिंग की है। - डॉ. अर्जित गौरव, मनोचिकित्सक।