जन्माष्टमी पर दीपकों की रोशनी से जगमग होगा कुंज बिहारी मंदिर
झांसी। महानगर के प्राचीन श्री कुंज बिहारी जी का मंदिर जन्माष्टमी पर लोगों को बिजली की बचत करने के लिए प्रेरित करेगा। पर्व पर मंदिर को बिजली की रंगबिरंगी झालरों से नहीं सजाया जाएगा। मिट्टी के एक हजार दीपकों से मंदिर को मोहक ढंग से सजाया जाएगा। केला के पत्ते, बेला, चमेली, कदम के फूलों व बेलों से प्राकृतिक छटा प्रदान की जाएगी।
बुंदेलखंड में श्री कृष्ण एवं राधा जू की भक्ति का प्रमुख केंद्र श्री कुंज बिहारी जी के मंदिर में नियमित रूप से सैकड़ों श्रद्धालु अपने ईष्ट के दर्शन के लिए उमड़ते हैं। इनमें हिंदू धर्म के अलावा कई अन्य धर्मों के लोग भी शामिल हैं। मंदिर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी एवं राधा जू की जन्माष्टमी धूमधाम से मनायी जाती है। मंदिर के महंत राधा मोहन दास महाराज ने बताया कि 24 अगस्त को मंदिर में जन्माष्टमी उत्सव का आयोजन होगा। पहली बार एक हजार मिट्टी के दीपकों की रोशनी में जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। यह परंपरा राधाष्टमी सहित अन्य त्यौहारों पर भी जारी रहेगी।
उनके अनुसार पूर्व में बिजली की झालरों से मंदिर को सजाया जाता था। इससे बिजली ऊर्जा की खपत अधिक होती थी। बिजली की बचत हो, इस उद्देश्य से इस बार मंदिर परिसर मेें बिजली की झालरें नहीं लगाने का निर्णय लिया है। उनके अनुसार जन्माष्टमी दिवस की सुबह वेद मंत्रों के बीच दूध, दही, शहद, घी, गंगाजल से भगवान का अभिषेक किया जाएगा। मनमोहक श्रृंगार कर भव्य झांकी में भगवान को विराजमान किया जाएगा। उनके अनुसार भगवान श्री कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र अष्टमी तिथि को भादो माह में कृष्ण पक्ष की मध्य रात्रि में हुआ था। उस दिन चंद्रमा वृष राशि में विद्यमान था। इस बार 24 अगस्त को सूर्योदय के समय अष्टमी की तिथि है। इस कारण से वैष्णव श्रद्धालु 24 को जन्माष्टमी मनाएंगे।