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बाइक पर सवार होकर किसान सम्मेलन में पहुंच गए थे मुलायम सिंह

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झांसी। मुख्यमंत्री बनने से पहले और बाद के दौर में सपा संरक्षक व पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का क्षेत्र में लगातार आना-जाना रहा। एक बार तो वे कानपुर से रोडवेज की बस में सवार होकर झांसी आ गए थे। जबकि, एक बार में वे पूंछ में आयोजित किसान सम्मेलन में बाइक पर सवार होकर पहुंच गए थे। क्रांति रथ पर सवार होकर गांव-गांव घूमकर उन्होंने क्षेत्र के किसानों के बीच मजबूत पकड़ बनाई थी।
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जनता पार्टी की सरकार में मुलायम सिंह यादव प्रदेश के सहकारिता मंत्री थे। पहली बार वे 1978 में झांसी आए थे। बिपिन बिहारी इंटर कॉलेज के ग्राउंड में आयोजित पिछड़ा वर्ग सम्मेलन को उन्होंने संबोधित किया था। सन 1980 में चौधरी चरण सिंह ने उन्हें लोक दल का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। इसके बाद मुलायम ने बुंदेलखंड पर विशेष फोकस कर दिया था। वे कमोबेश बुंदेलखंड के सभी जनपदों का दौरा करते रहते थे। सबसे ज्यादा आना जाना उनका झांसी में होता था। यहीं से वे क्षेत्र की राजनीति को साधते थे। इसी दरम्यान एक बार वे रोडवेज की बस में सवार होकर झांसी आए थे। उनके करीबी रहे चंद्रपाल सिंह यादव ने बताया कि बस में सवार होने पर उनसे जुड़े कुछ लोगों ने उन्हें टोका भी था, तब मुलायम ने कहा था कि सियासत में आम आदमी से जुड़ाव रहना बेहद जरूरी है। चंद्रपाल ने बताया कि मुलायम रास्ते भर बस में बैठे लोगों ने विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते आए थे। जबकि, इसी दरम्यान एक बार पूंछ में किसान सम्मेलन का आयोजन हुआ था। मुलायम सिंह जीप में सवार होकर झांसी से पूंछ जा रहे थे। गाड़ी पुरानी होने की वजह से रफ्तार नहीं पकड़ पा रही थी। इससे सम्मेलन में पहुंचने में पहले ही काफी देर हो चुकी थी। इस पर मुलायम रास्ते में जीप से उतर गए थे और एक कार्यकर्ता के साथ बाइक पर सवार होकर सम्मेलन में पहुंच गए थे।
बुंदेलखंड विकास निधि की दी थी सौगात
झांसी। साल 1989 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने पर मुलायम सिंह यादव ने बुंदेलखंड विकास निधि की शुरूआत की थी। इसके लिए अलग से बजट आवंटित किया गया था। यह प्रक्रिया अब भी जारी है। क्षेत्र में होने वाले ज्यादातर विकास कार्य बुंदेलखंड विकास निधि से ही कराए जाते हैं, खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में।
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और भी दीं कईं सौगात
झांसी। मुलायम के शासन काल में ही रामनगर पुल का निर्माण हुआ था। हमीरपुर-झांसी को जोड़ने वाला पुल बनवाया गया था। साथ ही मऊरानीपुर पुल का निर्माण भी हुआ था। मुलायम सिंह ने ही पैरा मेडिकल कॉलेज का निर्माण पूरा कराया था। साथ ही जिला अस्पताल का उच्चीकरण भी उनके ही शासन काल में हुआ था।
उप चुनाव में दिलाई थी जीत
झांसी। मुलायम सिंह यादव को बुंदेलखंड के लोगों ने भी भरपूर प्यार दिया था। इसकी बानगी 1983 में हुए जालौन की माधौगढ़ सीट पर हुए उप चुनाव में देखने को मिली थी। लोकदल विपक्ष में था और इस सीट से जितेंद्र शाह को प्रत्याशी बनाया गया था। मुलायम सिंह की बुंदेलखंड में अच्छी पकड़ को देखते हुए उन्हें माधौगढ़ उप चुनाव का प्रभारी बनाकर भेजा गया था। उस समय किसी को भी गुमान नहीं था कि यह सीट लोकदल के खाते में चली जाएगी। लेकिन, मुलायम के आते ही माहौल एकदम बदल गया था और लोकदल के प्रत्याशी ने यहां जीत दर्ज की थी।
सपा में चंद्रपाल को बनाया था कोषाध्यक्ष
झांसी। मुलायम सिंह के संघर्ष के दिनों से ही चंद्रपाल सिंह यादव उनके करीबी रहे। सपा गठन के बाद मुलायम सिंह ने चंद्रपाल को पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया था। चंद्रपाल बीस साल तक सपा के कोषाध्यक्ष बने रहे। इसके अलावा प्रदेश के सहकारिता मंत्री रहते हुए मुलायम सिंह ने ही चंद्रपाल को सहकारिता की राजनीति में ककहरा सिखाया था।
तीन दिन बना रहा था झांसी प्रदेश की राजधानी
झांसी। साल 2004 में झांसी तीन दिन तक प्रदेश की राजधानी बना रहा था। उस समय मुलायम सिंह यादव प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। यहां लक्ष्मी व्यायाम मंदिर में पार्टी ने राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया था। इसके लिए मुलायम सिंह यहां तीन दिन तक रुके रहे थे। सर्किट हाउस उनके आवास में तब्दील हो गया था। अखिलेश यादव भी उनके साथ झांसी में रहे थे। इन तीन दिनों के दरम्यान मुलायम पार्टी के कई नेताओं व कार्यकर्ताओं के घर भी गए थे।
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