झांसी का किला घूमने आने वाले पर्यटकों पर बंदरों के हमले का खतरा बना रहता है। बंदर आए दिन पर्यटकों को नुकसान पहुंचाते रहते हैं। बावजूद, नियंत्रण के कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं। इसमें पुरातत्व विभाग अपनी लाचारी बता रहा है।
वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की गौरवगाथा के चलते किले में पर्यटकों का आवागमन लगा रहता है। लेकिन, यहां पर्यटकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। इसकी वजह बंदर बने हुए हैं।
किले में तीस से अधिक बंदर और आधा दर्जन से अधिक कुत्ते हैं। जिनका आतंक पिछले एक अर्से से बना हुआ है। आए दिन ये सैलानियों पर हमलावर हो जाते हैं। किसी को काट लेते हैं, तो किसी का मोबाइल अथवा पर्स छीन ले जाते हैं। सोमवार को भी ऐसा हुआ। सैलानियों के मुताबिक वह ऐतिहासिक स्मारक को देखने आते हैं। लेकिन, बंदरों के झुंड को देखकर आगे बढ़ने का साहस उठा पाते। पूरा किला घूमे ही अक्सर वापस लौट जाते हैं।वहीं, पुरातत्व विभाग का कहना है कि स्थानीय लोग आस्था के चलते खाने-पीने की सामग्री बंदरों को के लिए डाल जाते हैं। इसके बाद जब इन्हें भूख लगती है, तो वह सैलानियों पर हमला कर देते हैं।
बंदरों को पकड़ने के लिए वन विभाग और नगर निगम को सूचना दी है। गेट पर तैनात कर्मचारी सैलानियों को बता देते है कि वह बंदरों से सावधान रहें और सेल्फी लेने से बचें। इसके अलावा कर्मचारी सैलानियों की मदद को राउंड पर रहते हैं। - पीकेके रेड्डी, संरक्षा सहायक-भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग
शासन का निर्णय है कि नगरीय क्षेत्र में बंदरों के पकड़ने का काम नगर निगम का है। बंदरों को पकड़ने के लिए नगर निगम को कोई मदद चाहिए, तो वन विभाग पूर्ण सहयोग देगा। - डा. मनोज कुमार शुक्ला, डीएफओ
समस्या है गंभीर, कार्रवाई होगी
समस्या गंभीर है। नगर निगम के अधिकारियों से इसके निराकरण के लिए बातचीत की जाएगी। इसके बाद जल्द ही वन विभाग और पुरातत्व विभाग के सहयोग से बंदरों को पकड़ने के लिए कार्रवाई होगी।
- रामतीर्थ सिंघल महापौर