फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किले के मैदान में लगे पंचकुइयां का मेला

Tue, 16 Oct 2018 01:01 AM IST
amarujala
विज्ञापन
mela, jhansi news - फोटो : amar ujala, jhansi news
विज्ञापन
नवरात्र में पंचकुइयां पर लगने वाला परंपरागत मेला अब वृहद रूप ले चुका है। ये सड़कों तक आ गया है। अमर उजाला ने पड़ताल की तो पता चला कि मेले में असुविधा और असुरक्षा का भाव बढ़ गया है। हालात ये हैं कि आकस्मिक स्थिति में फायर ब्रिगेड भी मेले में आसानी से दाखिल नहीं हो सकती। जगह की कमी की वजह से जन सुविधा के साधन भी विकसित नहीं हो पा रहे हैं। इस पड़ताल में एक सशक्त विकल्प भी सामने आया। वर्तमान मेला स्थल के पास सड़क के उस पार किले के नीचे बड़ा मैदान खाली पड़ा हुआ है। ऐसे में लोगों का मानना है कि परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए मेला किले के मैदान में लगाया जाना चाहिए और पंचकुइयां की जगह केवल मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित रखी जानी चाहिए।
विज्ञापन


शहर के पंचकुइयां इलाके में शीतला माता मंदिर के पास में साल में दो बार चैत्र व शारदीय नवरात्रि में मेला लगता है। मेले की ये परंपरा दो सौ साल पुरानी मानी जाती है। किसी जमाने में ये मेला मंदिर के इर्दगिर्द कुछ दुकानों तक सीमित था। लेकिन, अब इसका दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पंचकुइयां और मंदिर की ओर आने वाली संकरी गलियों में लगभग दो सौ दुकानें सजती हैं। इसके अलावा खंडेराव गेट से कोतवाली की ओर जाने वाली सड़क पर भी मेला सजा रहता है। साथ ही, गाड़ियों की पार्किंग होती है। मेले में नौ दिनों तक सुबह से लेकर देर रात तक भारी भीड़ जमा रहती है। जगह कम और भीड़ का दबाव अधिक होने की वजह से लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। मेले में धक्कामुक्की की स्थिति बनी रहती है। इसका फायदा असामाजिक तत्व भी उठाते हैं। इसके अलावा हमेशा खतरा भी बना रहता है। यहां हालात ये हैं कि आकस्मिक स्थिति में फायर ब्रिगेड व एंबुलेंस जैसे वाहन भी मेले में आसानी से दाखिल नहीं हो सकते हैं।   
जबकि, खंडेराव गेट से कोतवाली की ओर जाने वाली सड़क के उस पार किले का विस्तृत मैदान खाली पड़ा रहता है। इसका उपयोग न होने की वजह से इसमें कचरा फेंका जाता है और झाड़ियां लगी हुई हैं। लोग लघुशंका और शौच के लिए मैदान का
विज्ञापन


उपयोग करते हैं। इन हालातों में लोगों का मानना है कि आगे से पंचकुइयां पर लगने वाला मेला किले के मैदान में लगाया जाए। ये मैदान इतना बड़ा है कि इसमें वर्तमान से कहीं अधिक बड़ा मेला लग जाएगा और पार्किंग भी यहीं हो जाएगी। नवरात्र के दिनों में भी सड़क एकदम खाली रहेगी। जबकि, पंचकुइयां वाली जगह केवल श्रद्धालुओं के लिए आरक्षित रखी जाए। यहां लोग पैदल मंदिर आएं और तसल्ली से मां के दर्शन करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें