झांसी। शुक्रवार शाम रेलवे की क्लर्क खुशबू श्रीवास्तव जीवनशाह तिराहा पर जाम में फंसने के बाद डंपर की चपेट में आकर मौत का शिकार बनी। अतिक्रमण की चपेट में आने के चलते जीवनशाह तिराहा पर रोज दुर्घटनाएं हो रही हैं। पार्किंग न होने के चलते वाहन सड़क पर खड़े होने से यहां प्रतिदिन जाम लग रहा है।
जीवनशाह तिराहा के आसपास होटल, व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स और मार्केट बनी हुई हैं। किसी में भी पार्किंग की व्यवस्था न होने से वाहन सड़कों पर खड़े होते हैं। इससे दिन भर जाम की स्थिति बनी रहती है। शुक्रवार को भी महानगर में कई शादियां थीं। ऐसे में इलाइट चौराहा से लेकर जीवनशाह तिराहा के पास बने होटलों में भारी भीड़ थी। शाम से ही लोगों ने अपने वाहन सड़कों पर खड़े कर दिए थे। इससे यहां जाम लगना शुरू हो गया था। शाम को मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय में तैनात थाना कोतवाली के गोलाकुआं निवासी खुशबू श्रीवास्तव स्कूटी से घर लौटते समय जीवनशाह तिराहा पर जाम लगने के कारण वह फंस गईं। इसी बीच पीछे से आ रहे डंपर ने टक्कर मार दी। इसकी चपेट में आकर मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी।
जीवनशाह तिराहा पर अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई न होने के चलते दिन भर यहां लोगों को जाम से जूझना पड़ता है। कई बार अभियान भी चलाया गया, लेकिन आज तक सुधार नहीं हो सका। इसका नतीजा शुक्रवार की शाम बड़ी घटना के रूप में सामने आया है।
यातायात पुलिस का कोई भी जवान यहां नजर नहीं आता। इसके चलते दिन भर यहां जाम की स्थिति रहती है। यहां की व्यवस्थाएं भगवान भरोसे हैं। हेमंत कुशवाहा, तहसील निवासी
जीवनशाह तिराहा के इर्दगिर्द वाहनों के दिन भर खडे़ रहने से जाम लगता है। यहां खड़े होने वाले किसी भी वाहन का पुलिस चालान नहीं करती। जितेंद्र, आवास विकास
जीवनशाह के पास सबसे बड़ी समस्या पार्किंग न होना है। यहां पर पार्किंग नहीं होने के चलते वाहन सड़क पर खड़े रहने से समस्या बनी रहती है। चंद्रमोहन श्रीवास्तव,
पुलिस को यहां सख्ती दिखानी होगी, तब कहीं जाकर यहां की समस्या दूर हो सकेगी। पुलिस शाम के समय केवल चालान काटती नजर आती है। शिवम शर्मा,
घर की जिम्मेदारी निभाती थीं खुशबू
- मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय के कार्मिक विभाग में थीं तैनात
- डंपर चालक पर हुई एफआईआर
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। हादसे के बाद से खुशबू के घर में कोहराम मचा हुआ है। वह घर में उसकी लाड़ली थी। पिता की मौत के बाद नौकरी मिलने पर वह घर के सभी सदस्यों का खूब ख्याल रखती थी। अचानक हुए हादसे के बाद घर में मातम पसरा हुआ है।
खुशबू श्रीवास्तव के पिता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव रेलवे के पार्सल विभाग में तैनात थे। दो साल पहले हुए राजेंद्र के निधन के बाद खुशबू को अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। वर्तमान में वह मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय के कार्मिक विभाग में क्लर्क थी। खुशबू दो बहनों में सबसे बड़ी थी। नौकरी मिलने के बाद वह घर की पूरी जिम्मेदारी निभाती थी। हादसे के बाद से पूरे परिवार में गम में माहौल है। शनिवार को पोस्टमार्टम हाउस पर रिश्तेेदार जमा रहे। घटना के बाद पुलिस ने चाचा गोपाल कृष्ण श्रीवास्तव की तहरीर पर डंपर चालक पर मुकदमा दर्ज कर लिया है।
18 घंटे में रेलवे ने कर दिया अंतिम भुगतान
हादसे के बाद रेलवे ने 18 घंटे के भीतर ही खुशबू श्रीवास्तव के प्रपत्र तैयार कर अंतिम भुगतान किया है। मंडल में यह पहली बार है जब रेलवे ने महज 18 घंटे में आकस्मिक मौत के बाद किसी का अंतिम भुगतान किया है। हादसे के बाद वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी राजेश कुमार गुप्ता ने मेडिकल कॉलेज पहुंचकर प्रक्रिया को मौके पर ही पूरा कराया। इसके बाद परिजनों को भुगतान किया गया।