झांसी। कोरोना संक्रमण की तेज रफ्तार को काबू में करने के लिए पुलिस फिर एक्शन में है। मास्क पहनाने से लेेकर साप्ताहिक लॉकडॉउन का कड़ाई से पालन कराने को फोर्स सड़कों पर नजर आ रहा। हॉटस्पॉट एवं कोविड अस्पतालों में भी पुलिस की चौकसी है लेकिन पुलिस बल को इसकी कीमत भी चुकानी पड़ रही है। हालिया संक्रमण को देखते हुए जनपद के हर चौथे सिपाही पर संक्रमण का खतरा बना हुआ है। सोमवार को थाना सीपरी बाजार इंस्पेक्टर समेत नवाबाद थाने में वाहन चालक कोरोना संक्रमित हो गए।
कोरोना काल में पुलिस की चुनौतियां काफी बढ़ गईं हैं। कानून-व्यवस्था के साथ अब मास्क समेत बचाव के दूसरे मोर्चो पर भी जूझना पड़ रहा लेकिन, इस नई चुनौती से निपटने के लिए पुलिस के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। जनपद में करीब ढाई हजार पुलिसकर्मी हैं। इनमें डेढ़ हजार पुलिसकर्मी विभिन्न थानों समेत फ्रंट लाइन पर तैनात हैं। इनमें हर चौथे सिपाही को लगातार फील्ड पर रहना पड़ता है। संक्रमण की जद में आने का सर्वाधिक खतरा इनके ऊपर ही मड़रा रहा है। कोविड का दूसरा जानलेवा चरण अत्यधिक घातक हो चुका।
पुलिसकर्मियों को न सिर्फ कोविड अस्पतालों में जाना पड़ रहा, बल्कि हॉटस्पॉट बने इलाकों में निगरानी के लिए भी रहना पड़ रहा है। अधिकांश पुलिसकर्मी कपड़े के बने मास्क ही इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी तरह थानों में न कोविड डेस्क काम करती है, न वहां सैनिटाइजर आदि का कोई इंतजाम रहता है। इसी वजह से पिछली बार बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी संक्रमित हो गए थे। वहीं, अभी भी कोविड से सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं होने से रोजाना पुलिसकर्मी संक्रमित हो रहे हैं।
एसपी सिटी विवेक त्रिपाठी का कहना है पहले दौर में कोरोना ने नुकसान पहुंचाया था, लेकिन अब फ्रंटलाइन वर्कर होने की वजह से अधिकांश पुलिसकर्मियों को वैक्सीन लगवाई जा चुकी है। ऐसे में संक्रमण की दर काफी कम हो गई है।
पुलिसकर्मियों के लिए अलग से कोई अस्पताल नहीं
जनपद के पुलिसकर्मियों के लिए अलग से कोई अस्पताल नहीं है। उनको उपचार के लिए जिला अस्पताल पर ही निर्भर रहना पड़ता है। कोविड के दौर में भी पुलिसकर्मियों के लिए न कोई अस्पताल बनाए गए और न ही उनको उपचार की कोई दूसरी सुविधा उपलब्ध कराई गई है।