Ken Betwa project struck with MPs insistence
झांसी। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच पानी के बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बन पाने के कारण केन - बेतवा लिंक परियोजना एक जगह ठहरी हुई है। उत्तर प्रदेश रबी की फसल के लिए जितने पानी की मांग रहा है, उतना मध्य प्रदेश सरकार देने को तैयार नहीं है। जबकि, मुख्यमंत्री इस मामले को लेकर कई बार जलशक्ति मंत्रालय को पत्र लिख चुके हैं। अब दिल्ली में अगले महीने होने वाली बैठक में कोई निष्कर्ष निकलने की उम्मीद है।
केन-बेतवा लिंक परियोजना का खाका 2008 में तैयार किया गया था। इस योजना पर नौ हजार करोड़ रुपये खर्च होने थे। इससे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के तीन-तीन जिलों की 6,35,661 हेक्टेयर भूमि सिंचित होनी है। परियोजना को शुरू करने के लिए केंद्र ने दोनों प्रदेशों की सरकारों से कहा, लेकिन पानी का बंटवारा आड़े आ गया। उत्तर प्रदेश गैर बारिश वाले महीनों में (रबी की फसल के लिए) बोधन गांव के निकट बनने वाले गंगोई बांध से 935 टीएमएसी पानी मांग रहा है, जबकि मध्य प्रदेश 700 टीएमसी पानी देने को तैयार है। जल शक्ति मंत्रालय में कई बैठकों के बाद भी इस पर सहमति नहीं बन सकी। इस दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री समेत अन्य जिम्मेदार अफसरों ने केन बेतवा की बाधा दूर करने के दावे किए, लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हो सका।
रबी की फसल के लिए यूपी ज्यादा पानी मांग रहा है, जिस पर मध्य प्रदेश की सरकार राजी नहीं है। इस कारण सहमति नहीं बन पा रही है। दिल्ली में जल्द ही इस विषय को लेकर बैठक होने जा रही है। समझौता रिपोर्ट पर हस्ताक्षर होते ही इस योजना पर काम शुरू होगा।
राघवेंद्र कुमार गुप्ता, अधिशासी अभियंता, राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण।
इस तरह बंटना है पानी
केन बेतवा लिंक परियोजना शुरू होे जाने के बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की डेढ़ लाख हेक्टेयर से अधिक जमीन सिंचित हो जाएगी। मध्य प्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़ और पन्ना जिले में अब तक सिंचित क्षेत्र का कुल रकबा 2 लाख 87 हजार 842 हेक्टेयर है, जो नहर बन जाने के बाद 3 लाख 69 हजार 881 हेक्टेयर हो जाएगा। इसी तरह उत्तर प्रदेश के बांदा, महोबा व झांसी जिले में अब तक सिंचित रकबा 2 लाख 27 हजार 373 हेक्टेयर है। यह बढ़कर दो लाख 65 हजार 780 हो जाएगा। आंकड़ों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसका लाभ यूपी को एमपी की अपेक्षा काफी कम मिलेगा।