ललितपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना का लाभ जनपद को मिलेगा। इस योजना से गोविंद सागर बांध के लिए सिंचाई विभाग ने 56 एमसीएम पानी की मांग रखी है। इससे बांध में सालभर पानी रहेगा और इसका लाभ शहर सहित ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को मिलेगा।
केन बेतवा लिंक प्रोजेक्ट से गोविंद सागर बांध को जाखलौन के पास बेतवा नदी से पानी लिफ्ट करने की उम्मीद जगी है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद राजघाट बांध में यूपी के हिस्से वाले पानी को जाखलौन के पास से लिफ्ट करके गोविंद सागर बांध को भरा जाएगा। इससे गोविंद सागर बांध में वर्षभर पर्याप्त पानी रहेगा। केन बेतवा लिंक परियोजना में जनपद के लिए पानी देना आरक्षित किया गया है।
इसके लिए राजघाट निर्माण खंड ने गोविंद सागर बांध के लिए 56 एमसीएम पानी की मांग केन बेतवा लिंक परियोजना के तहत की है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार बेतवा नदी से पानी लेने के लिए जाखलौन पंप कैनाल के पास से एक आरसीसी नहर बनाए जाने का प्रस्ताव है।
यह नहर गोविंद सागर बांध तक पहुंचाई जाएगी। इसके लिए केन बेतवा लिंक परियोजना वाले सर्वे करेंगे और उसे धरातल पर लाएंगे। अब इस परियोजना की आधारशिला रखे जाने से केन बेतवा लिंक परियोजना के काम में तेजी आने और गोविंद सागर बांध के भरने की उम्मीद है।
जिले की डिवीजन का किया गया था विलय : केन बेतवा लिंक परियोजना में जिले के डिवीजन सिंचाई निर्माण खंड तृतीय का विलय किया गया था। इस डिवीजन के अंतर्गत कचनौंदा बांध निर्माण और लोअर राजघाट कैनाल का काम था।
यूपी का राजघाट बांध में 22 टीएमसी है हिस्सा : मध्य प्रदेश से होकर आने वाली बेतवा नदी पर जनपद में राजघाट बांध परियोजना निर्मित है। इसके लिए यूपी-एमपी के बीच समझौता हुआ था। 22 टीएमसी (ट्रिलियन क्यूबिक मीटर) पानी यूपी व 22 टीएमसी पानी एमपी को मिलना था।
यूपी अपने हिस्से के 22 टीएमसी पानी में से 8 टीएमसी पानी को अन्य उपयोग में लेता है। जबकि, 14 टीएमसी पानी को झांसी, पारीछा में मांग के अनुसार छोड़ा जाता है। केन बेतवा लिंक परियोजना पूरी होने पर झांसी, पारीछा सहित अन्य जनपद को पानी की समस्या नहीं रहेगी। इससे राजघाट बांध में यूपी के हिस्से वाला बचा रहेगा।
सीमावर्ती गांव बंदरभोज क्षेत्र में नेपाल के रास्ते पर जाते बाइक सवार। संवाद- फोटो : आत्मरक्षा का प्रशिक्षण प्राप्त करतीं छात्राएं।
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