केन-बेतवा नदी जोड़ों परियोजना में पानी के बंटवारे का व्यवधान दूर होने पर अब इसके धरातल पर उतरने का रास्ता साफ हो गया है। इस परियोजना से यूपी के बांदा, महोबा, झांसी और एमपी के टीकमगढ़, पन्ना और छतरपुर जिलों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा।
बुंदेलखंड के सूखे खेतों के लिए वरदान मानी जा रही केन-बेतवा लिंक परियोजना अपने प्रारंभिक दौर में नौ हजार करोड़ रुपये की केन-बेतवा लिंक परियोजना अब 19 हजार करोड़ की लागत पर पहुंच गई है, जिससे मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के तीन-तीन जिलों की 6,35,661 हेक्टेयर भूमि सिंचित होनी है। परियोजना के मुताबिक बांदा व छतरपुर जिले की सीमा पर बोधन गांव के निकट गंगोई बांध से केन नदी को तीस मीटर चौड़ी कंक्रीटनहर बनाकर आगे ले जाना है। धसान नदी पर एक टर्नल (सुरंग) बनाकर आगे बढ़ाया जाएगा। छतरपुर के हरपालपुर से होकर यूपी के मऊरानीपुर बार्डर से एमपी के जतारा तहसील के गांवों से होकर इस नहर को बरुआसागर डैम के ऊपर से ओरछा के नीचे स्थित नोटघाट पुल में मिला दिया जाएगा।
उत्तरप्रदेश की धरती पर जब प्रभावित क्षेत्र है ही नहीं तो सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह नहर यूपी के बार्डर को छूकर एमपी से ही निकलेगी। इससे साफ है कि पानी का अधिक फायदा मध्य प्रदेश को ही होने वाला है। इसके बावजूद मध्य प्रदेश सरकार ने पानी बंटवारे को लेकर परियोजना में फिर बाधा उत्पन्न कर रखी थी।
मगर, सोमवार को केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में आयोजित दोनों प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में पानी बंटवारे का व्यवधान खत्म होने के बाद इस योजना के धरातल पर उतरने का रास्ता साफ हो गया है।
ये भूमि होगी सिंचित
मध्यप्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़ व पन्ना जिले में अब तक सिंचित क्षेत्र का कुल रकबा 2 लाख 87 हजार 842 हेक्टेयर था, जो इस नहर के बन जाने के बाद 3 लाख 69 हजार 881 हेक्टेयर हो जाएगा। इसी तरह उत्तर प्रदेश के बांदा, महोबा व झांसी जिले में अब तक सिंचित रकबा 2 लाख 27 हजार 373 हेक्टेयर है यह बढ़कर दो लाख 65 हजार 780 हो जाएगा। आंकड़ों को देखकर ही यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसका लाभ यूपी को एमपी की अपेक्षा काफी कम मिलेगा।