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सरकारी गोदामों से कीटनाशक नदारद, भटक रहे किसान

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झांसी। खरीफ फसल की बुवाई के बाद अब किसानों के सामने उसे बचाने का संकट पैदा हो गया। इस समय मूंगफली, मूंग, उर्द की फसलों में कीड़े एवं फंफूद लगती दिख रही है लेकिन, सरकारी गोदामों से कीटनाशक ही नदारद है। ऐसे में फसल बचाने के लिए किसानों को कीटनाशक ही नहीं मिल रहा। कुछ मजबूत किसान बाजार से दोगुनी-तिगुनी कीमत पर कीटनाशक खरीदकर अपनी फसल बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
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किसानों ने हाड़तोड़ मेहनत से मौसम के प्रतिकूल होने के बावजूद चिरगांव, बबीना, मोंठ आदि इलाकों में मूंगफली, तिल, उर्द की अच्छी फसल तैयार कर ली लेकिन, वातावरण के प्रभाव से अब उनमें कीटों का खतरा मड़राने लगा है। तमाम जगहों पर मूंगफली, तिल, उर्द में पीली चित्ती, मुजैक, सफेद गियार, फफूंद आदि लगने से फसलों को नुकसान होने की शिकायत मिल रही। इनसे बचाव के लिए कार्बेडोजिम, थीरम, डाइमेथोएट, इमेजाथापर, एल्यूमीनियम फॉस्फेट, मैंकाजेब जैसे कीटनाशकों का छिड़काव किया जाता है लेकिन, हैरानी की बात यह कि सरकारी गोदामों में इनमें से कोई कीटनाशक मौजूद नहीं हैं। गोदामों में कुछ दीमक एवं फफूंदनाशकों को छोड़कर कोई प्रभावी कीटनाशक उपलब्ध नहीं है।
कृषि रक्षा विभाग को कीटनाशकों की सीधी आपूर्ति शासन की ओर से तय एजेंसियों की ओर से होती है लेकिन, पिछले सीजन से ही यहां कीटनाशक नहीं भेजे जा रहे। बताया जाता है कि शासन स्तर पर ही मामला पचड़े में फंसे होने से कीटनाशकों की आपूर्ति नहीं हो रही। अनुमान के मुताबिक यहां करीब 5000 हजार लीटर कीटनाशकों की आवश्यकता पड़ती है लेकिन, पिछली सीजन से आपूर्ति पूरी तरह ठप पड़ी है। इसका खामियाजा किसानों को भुगताना पड़ रहा। जब फसल को बचाने के लिए उनको कीटनाशकों की जरूरत पड़ रही तब सरकारी एजेंसियों ने हाथ खड़े कर दिए। ऐसे में मजबूत किसान खुले बाजार से कीटनाशक लेकर उनका छिड़काव कर रहे हैं जबकि अन्य किसान अपनी फसल का बचाव भी नहीं कर पा रहे। ऐसे किसान फफूंदी नाशकों का छिड़काव करने अपनी फसल बचाने की कोशिश कर रहे।
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अभी नई आपूर्ति नहीं मिली है हालांकि पिछली बार के कीटनाशक उपलब्ध कराए जा रहे हैँ। गोदाम में ट्राइकोडरमा जैसे कीटनाशक मौजूद हैं। नई आपूर्ति आने पर वह भी किसानों के बीच वितरित की जाएगी।
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विवेक कुमार, जिला कृषि रक्षा अधिकारी
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