झांसी। स्मार्ट ग्रिड प्रोजेक्ट पर काम तेजी से शुरू हो गया है। ‘नेशनल स्मार्ट ग्रिड मिशन’ प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रभु नाथ सिंह ने झांसी के बिजली विभाग से यहां की पूरी जानकारी मांगी है। इस प्रोजेक्ट के लागू होने के बाद सभी उपभोक्ता स्मार्ट कंट्रोलरूम से जुड़ जाएंगे। उनकी पूरी जानकारी कंट्रोलरूम के पास होगी। बकाए पर बिजली कनेक्शन खुद कट जाएगा। बिजली चोरों पर शिकंजा कसेगा।
गौरतलब है कि भारत सरकार के ‘टेक्निकल प्रपोजल टू नेशनल स्मार्ट ग्रिड मिशन मार्च 2016’ के तहत यूपी के झांसी, बरेली, कानपुर और इलाहाबाद को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना जाना लगभग तय हो गया है। इस प्रोजेक्ट का मकसद लाइन लॉस की आड़ में हो रही बिजली चोरी रोकना और उपभोक्ताओं को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं उपलब्ध करवाना है।
केंद्र सरकार ने इस ‘स्मार्ट ग्रिड प्रोजेक्ट’ का काम सीमेंस कंपनी को सौंपा है। कंपनी ने हाल में ही ब्राजील में इसी तरह के प्रोजेक्ट को पूरा किया है, जहां चोरी व लाइन लॉस घटकर पांच प्रतिशत रह गया है। दरअसल यहां की सबसे बड़ी समस्या लाइन लॉस की आड़ में बिजली चोरी है।
इससे ईमानदार उपभोक्ता ज्यादा प्रभावित हो जाते हैं। जिन इलाकों में कटिया के जरिए बिजली चोरी की जाती है, वहां ओवरलोड होकर ट्रांसफार्मर फुंक जाते या फिर फाल्ट हो जाता है।
‘स्मार्ट ग्रिड प्रोजेक्ट के जानकारी मांगी गई है। पूरी रिपोर्ट शीघ्र ही बन जाएगी और उसे पावर कारपोरेशन को भिजवा दिया जाएगा।
राकेश कुमार गुप्ता
अधीक्षण अभियंता (नगर)।
ये फायदे होंगे
स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे, जो स्मार्ट कंट्रोलरूम के सर्वर से जुड़े होंगे। कंट्रोलरूम में देखा जा सकेगा कि कौन कितनी बिजली इस्तेमाल कर रहा है। ट्रांसफार्मर और विद्युत लाइनों पर निगाह होगी। पता लग जाएगा कहां किस तरह बिजली चोरी हो रही है। बिल भुगतान नहीं होने पर खुद बिजली कट जाएगी। बिजली चोरी रुक गई तो महानगर को 24 घंटे बिजली आपूर्ति की जा सकेगी।
ये जानकारी मांगी गई है
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-बिजली घरों की संख्या, उपभोक्ताओं की संख्या ,एक फेस व थ्री फेस मीटरों की संख्या, विद्युत लोड की स्थिति, एरियर बंच कंडक्टर कहां-कहां बिछाए गए हैं? ट्रांसफार्मरों की संख्या और उनकी क्षमता कितनी है? लाइन लॉस कितना है?
30 फीसदी बिजली चोरी
महानगर के साठ हजार से अधिक उपभोक्ताओं के मीटर परिसर के बाहर लगा दिए गए हैं। इसके बावजूद कुल खपत की 30 फीसदी बिजली चोरी हो जाती है। हर माह औसतन साढ़े चार करोड़ यूनिट बिजली खर्च होती है। गर्मी मांग बढ़कर पांच करोड़ बीस लाख यूनिट तक पहुंच जाती है। इस हिसाब से यूपी पावर कारपोरेशन को हर माह कम से कम 30-32 करोड़ का राजस्व मिलना चाहिए। लेकिन, 24 करोड़ से ज्यादा नहीं हो पाता।