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झांसी की आबोहवा में फल-फूल रहे कल्पवृक्ष, रुद्राक्ष और बादाम के पेड़

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झांसी। शहर की जमीन को भले ही पथरीली और इसकी आबोहवा को सूखा कहा जाता है लेकिन इसी जमीन पर कल्पवृक्ष, रुद्राक्ष, पीला सिंदूर, कपूर, हरि शंखनी और बादाम जैसे तमाम अमूल्य पेड़-पौधे पल-बढ़ रहे हैं। शायद आपको विश्वास नहीं हो रहा होगा कि यह पौधे यहां की पथरीली जमीन पर कैसे फल-फूल सकते हैं, लेकिन यह सच है आप चाहें तो अपनी आंखों से इन पेड़-पौधों को देख भी सकते हैं। असल में शहर के कमिश्नरी परिसर में स्थित जिला उद्योग केंद्र की बगिया में यह पेड़-पौधे शहर की शोभा बढ़ा रहे हैं, ये सभी अमूल्य पौधे उपायुक्त उद्योग सुधीर कुमार श्रीवास्तव द्वारा अपने खर्च पर लगाए गए हैं।
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इनका कहना है कि वे जब झांसी आए थे तब कार्यालय में ऊबड़-खाबड़ जमीन पड़ी थी। कुछ पेड़-पौधे थे लेकिन पथरीली जमीन और अच्छा रख-रखाव न होने से पौधे ठहर नहीं पा रहे थे। जमीन इतनी खराब थी कि कार्यालय आने-जाने वाले लोग अपनी गाड़ियां भी ठीक से खड़ी नहीं कर पाते थे। ऐसे में उन्होंने धीरे-धीरे पहले जमीन सही करवाई और कुछ प्रयास व सहयोग से जमीन का फर्श बन गया। इसके बाद उन्होंने पौधे लगाने की शुरूआत की। उन्होंने बताया कि वह जब भी लखनऊ, कानपुर, बनारस या काम के सिलसिले में कहीं जाते थे तो अपनी कार में पीछे ढेर सारे पौधे भरकर लाते थे और उन्हें यहां रोपकर उनकी देखभाल करते थे।
धीरे-धीरे करके चार-पांच सालों में उन्होंने यहां कल्पवृक्ष, अर्जुन, रुद्राक्ष, केवड़ा, पीला सिंदूर, बादाम, सफेद और लाल चंदन, कपूर, नाग चंपा, कुमुदिनी, कचनार, छोटी इलाइची, हरि शंखनी (पाकड़, पीपल और बरगद को मिलाकर लगाया गया पौधा) का पौधा रोपा। ये पौधे अब बड़े हो चुके हैं। कल्पवृक्ष और रुद्राक्ष की पूजा भी होती है।
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इन पौधों की देखभाल के लिए माली भी रखा गया। कोरोना काल में कोई माली नहीं मिला तो उन्होंने खुद ही पौधों की देखभाल की। यह सभी पौधे उन्होंने अपने पैसे से रोपे हैं। उन्होंने कहा कि पौधों को बड़ा देख और विभाग की हरियाली से उनके अलावा यहां आने-जाने वाले भी खुश होते हैं। इसके अलावा उन्होंने अंजीर, शरीफा, शहतूत, हाइब्रिड आम और आंवले के साथ-साथ कई पौधे लगा रखे हैं।
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