प्यासे को पानी पिलाना दुनिया का सबसे पुण्य काम माना जाता है। पुण्य कमाने व लोगों को पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सामाजिक संगठनों व प्रशासन की ओर से जगह-जगह स्थापित कराए गए पक्के प्याऊ केंद्रों का बुरा हाल है। रखरखाव के अभाव में अधिकांश प्याऊ केंद्रों से गंदा और संक्रमित पानी आ रहा है। ऐसे में पानी के प्रयोग से लोगों के बीमार होने की आशंका बढ़ गई है।
वर्तमान में नगर के कई ऐसे सार्वजनिक प्याऊ केंद्र हैं जो लोगों की प्यास बुझाने की बजाय बीमारियां दे रहें हैं। ज्यादातर प्याऊ केंद्रों पर पसरी गंदगी व कई वर्षों से टंकी की सफाई न होने से गंदा और दुर्गंधयुक्त पानी आ रहा है। कोतवाली-सिंधी चौराहा स्थित एक समाज सेवी संगठन द्वारा स्थापित प्याऊ पिछले कई वर्षों से बदहाल है। प्याऊ पर संस्था अपने सदस्यों के नामों की पट्टी चिपकाकर इसके रखरखाव के बारे में भूल गई। वहीं पंचकुईयां मंदिर के समीप स्थित एक समाज सेवी संगठन द्वारा निर्मित प्याऊ पानी तो दे रहा है, लेकिन उस पर लगी काई व गंदगी के चलते पीने योग्य नहीं। वहीं टंकी में कई सुराख होने से दिन भर पानी भी टपकता रहता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक प्याऊ के पानी को कई श्रद्धालु मंदिर में पूजन कार्य में भी प्रयुक्त करते हैं। इसी प्रकार खंडेराव गेट पर मौजूद सार्वजनिक प्याऊ एवं बड़ा बाजार स्थित नगर निगम द्वारा निर्माणाधीन प्याऊ गंदगी एवं टंकी की सफाई के अभाव में लोगों की प्यास बुझाने की बजाय उन्हें बीमारियां दे रहे हैं।