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आवारा कुत्ते बने जान के दुश्मन

Thu, 25 Aug 2016 01:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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dogs, jhansi news - फोटो : amar ujala, jhansi news
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झांसी। शहर में छुट्टा कटखने कुत्तों की बहुतायत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इनके शिकार रोज औसतन 80 लोग जिला अस्पताल इलाज के पहुंचते हैं। इन्हें एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाए जाते हैं जो बेहद दर्द देते हैं। इनमें 99 फीसदी कुत्ते और बाकी अन्य जानवरों के काटे हुए मरीज होते हैं। इन चौंका देने वाले आंकड़ों के बावजूद शहर में आवारा कुत्तों को पकड़ने का कोई इंतजाम नहीं है। 
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महानगर की संकरी गलियां हों या प्रमुख मार्ग, सभी जगह छुट्टा जानवर नजर आ जाते हैं। इसमें कुत्तों की संख्या सर्वाधिक है। ये यातायात को बाधित तो करते ही हैं, साथ ही राहगीरों की जान के दुश्मन बन गए हैं। वाहनों की पीछे  कुत्तों का पूरा झुंड दौड़ पड़ता है और तब संतुलन बिगड़ जाता है। वाहन चालक गिरकर च जिला अस्पताल में एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने आने वालों की संख्या इधर काफी बढ़ी है। तीन महीने पहले तक औसतन रोज 50 मरीज आते थे पर अब संख्या बढ़कर 80 तक पहुंच गई है। मरीजों को चार इंजेक्शन लगाए जाते हैं। प

हला इंजेक्शन के लगने के बाद तीसरे दिन, सातवें दिन और अट्ठाइसवें दिन इंजेक्शन लगाया जाता है। इसके अलावा अन्य सरकारी अस्पतालों में भी एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाने की व्यवस्था है।  समस्या खतरनाक स्थिति में पहुंच चुकी है, लेकिन रोकथाम के उपाय शून्य हैं। पांच साल पहले नगर निगम ने कुत्तों की नसबंदी शुरू की थी, परंतु कुछ एक माह चलने के बाद यह व्यवस्था बंद हो गई। नतीजा यह है कि शहर में बेतहाशा रूप से कुत्ते बढ़ते जा रहे हैं।  
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24 घंटे में लगवाएं इंजेक्शन
कुत्ते के काटने पर सबसे पहले फर्स्ट एड लें तथा चौबीस घंट के भीतर एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवा लें। ज्यादा समय गुजरने पर यह असर नहीं करता। यदि कुत्ते को पहले से टीका लगा हुआ है, तो एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाना जरूरी नहीं होता है। 

रैबीज के यह हैं लक्षण 
- मरीज को बुखार आता है
- सिरदर्द रहता है 
- मानसिक संतुलन खो देता है
- हवा-पानी से डर लगने लगता है

बिल्ली के काटने पर भी एंटी रैबीज जरूरी 
कुत्ते के अलावा अन्य जानवर भी हैं, जिनके काटने पर एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाना जरूरी होता है। इसमें सबसे पहला नाम पालतू जानवर बिल्ली का है। इसके अलावा बंदर, नेवला, सियार, लोमड़ी के काटने पर भी एंटी रैबीज लगवाना जरूरी होता है। 

जानलेवा लाइलाज रोग है रैबीज 
रैबीज जानलेवा रोग है। कुत्ते के काटने के तुरंत बाद यह इसके वायरस सक्रिय हो जाते हैं। जो नसों के माध्यम से दिमाग में प्रवेश कर जाते हैं। यह रोग कई सालों पर बाद उभरकर सामने आता है। इसमें दिमाग पर मनुष्य का कंट्रोल खत्म हो जाता है। वह काटने दौड़ता है व पागलों की तरह हरकत करता है। एक बार रैबीज होने पर इसका इलाज नहीं है। यह जान लेकर ही जाता है। समय पर एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने से रैबीज वायरस सक्रिय नहीं हो पाते हैं।  
- डा. जकी सिद्दीकी, असिस्टेंट प्रोफेसर - मेडिकल कालेज 

इंजेक्शन की पर्याप्त उपलब्धता 
जिला अस्पताल में रोजाना औसत अस्सी एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाए जाते हैं। यह संख्या पहले की तुलना में काफी बढ़ी है। यहां निशुल्क इंजेक्शन लगाए जाते हैं। मरीज को सिर्फ पर्चा बनवाना पड़ता है। अस्पताल में इंजेक्शन की पर्याप्त उपलब्धता है।
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- डा. रमेश चंद्रा, सीएमएस - जिला अस्पताल  
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