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घर जा रहे श्रमिक की हालत बिगड़ी, आधा घंटे तक नहीं आई एंबुलेंस, तड़प-तड़प कर थम गईं सांसें 

Fri, 15 May 2020 06:11 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी अमर उजाला ब्यूरो, झांसी 

सार

  • चालक ने भी ट्रक से उतार दिया, मुंबई से झारखंड स्थित अपने घर जा रहा था 
  • समय पर मिल जाता इलाज तो बच सकती थी जान 
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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ट्रक में बैठकर महाराष्ट्र से झारखंड स्थित अपने घर जा रहे श्रमिक की रास्ते में ही हालत बिगड़ गई। अचानक से सांस फूलने लगी तो कोरोना वायरस के डर से ट्रक में सवार अन्य मजदूर भी घबरा गए। चालक ने रक्सा टोल प्लाजा के पास श्रमिक और उसके साथी को उतार दिया। सड़क पर पड़ा श्रमिक इलाज के लिए तड़पता रहा। मौके पर पहुंची पुलिस ने भी एंबुलेंस को फोन लगाया। आधे घंटे बाद तक एंबुलेंस नहीं पहुंची और धूप में जमीन पर पड़े-पड़े श्रमिक की सांसें थम गईं।
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बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र के भिवंडी से द्वारिका प्रसाद (50) अपने साथी प्रदीप प्रसाद के साथ झारखंड के हजारीबाग जाने के लिए ट्रक पर सवार हो गए। लगभग शाम साढ़े चार बजे झांसी के रक्सा टोल प्लाजा से लगभग एक किलोमीटर आगे ट्रक पहुंचा ही था कि द्वारिका प्रसाद की हालत बिगड़ने लगी। गर्मी की वजह से श्रमिक को पसीना आने लगा और घबराहट शुरू हो गई। 

सांस भी फूलने लगी तो आसपास बैठे श्रमिक भी घबरा गए। उन्होंने चालक को सूचना दी तो उसने ट्रक से उतर जाने के लिए कहा। वो अपने साथी प्रदीप के साथ ट्रक से उतरकर जमीन पर लेट गया। श्रमिक की तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी। कुछ देर बाद रक्सा पुलिस और कुछ लोग भी मौके पर पहुंच गए। 
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पुलिस और लोगों ने एंबुलेंस को फोन लगाकर श्रमिक की तबीयत बिगड़ने की जानकारी दी। आधे घंटे बाद तक एंबुलेंस नहीं पहुंची और द्वारिका प्रसाद ने जमीन पर पड़े-पड़े ही दम तोड़ दिया। बताया गया कि फिर टोल प्लाजा की निजी एंबुलेंस मौके पर पहुंची और श्रमिक को मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

समय पर पहुंच जाती एंबुलेंस तो बच जाती जान 
मृतक के साथी श्रमिक प्रदीप का कहना है कि यदि समय पर एंबुलेंस पहुंच जाती तो द्वारिका प्रसाद की जान बच सकती थी। एंबुलेंस को लगातार फोन किया जाता रहा लेकिन द्वारिका प्रसाद के मरने के बाद भी टोल प्लाजा की निजी एंबुलेंस पहुंची। सरकारी तब भी नहीं आई। श्रमिक की तबीयत खराब होने की सूचना एंबुलेंस को दी गई थी। आधे घंटे के अंतराल में टोल प्लाजा और सरकारी एंबुलेंस पहुंच गई थी। - विजय पांडेय, थानाध्यक्ष, रक्सा।
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