पड़ोसी के उकसाने पर छात्रा ने जहर निगल कर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने दो आरोपी और एक बाल अपचारी के खिलाफ मामला दर्ज किया था। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया था। दो को जेल भेजा था, जबकि बाल अपचारी को बाल सुधार गृह भेज दिया था। अब दोष सिद्ध होने पर पॉक्सो एक्ट के अपर सत्र न्यायाधीश मोहम्मद न्याज अंसारी ने दोनों को 20-20 साल का कारावास और एक-एक लाख का जुर्माना लगाया है।
एरच थाना क्षेत्र के रहने वाले ग्रामीण ने बताया कि उसकी 16 वर्षीय पुत्री 11वीं क्लास की छात्रा थी। स्कूल जाते समय पड़ोस का रहने वाला नाबालिग युवक उसे छेड़ता था। 6 नवंबर 2020 को उसकी पुत्री शिक्षक के घर से शाम चार बजे लौट रही थी, तभी नाबालिग ने उसका रास्ता रोक कर हाथ पकड़ लिया। चिल्लाने पर वह मौके से भाग गया। वादी और उसके भाई ने परिजनों से की, लेकिन बेटे को समझाने के बजाय गाली-गलौज कर छात्रा को आत्महत्या कर लेने का उलाहना दिया। पीड़ित पिता और उसका परिवार जब घर पहुंचा तो उसकी बेटी उल्टी कर रही थी। उसने बताया कि पड़ोसियों से तंग आकर उसने गेहूं में रखने वाली दवा खा ली। मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। उसके पास से सुसाइड नोट भी बरामद हुआ था, जिसमें नाबालिग और उसके परिजन अमर सिंह व कमल सिंह का नाम था।
पुलिस ने 7 नवंबर 2020 को अमर सिंह और कमल सिंह के साथ बाल अपचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत में सुनवाई के दौरान अमर सिंह और कमल सिंह को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी पाया गया।