फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jhansi: आधी रात तक खुला रहा खजाना, ताबड़तोड़ 55 करोड़ का भुगतान, विकास को मिलेगी रफ्तार

Wed, 01 Apr 2026 01:37 PM IST
दीपक महाजन अमर उजाला नेटवर्क

सार

सबसे अधिक 21 करोड़ रुपये नियोजन विभाग की ओर से ग्रामीण अभियंत्रण सेवा को दिए गए। भुगतान का सिलसिला देर रात तक चलता रहा और कोषागार में कामकाज रात 12 बजे तक जारी रहा।
विज्ञापन
वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन भुगतान के लिए आईं फाइलों की जांच करते मुख्य कोषाधिकारी। - फोटो : संवाद
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन कोषागार से करीब 55 करोड़ रुपये का भुगतान विभिन्न विभागों को किया गया। इसमें सबसे अधिक 21 करोड़ रुपये नियोजन विभाग की ओर से ग्रामीण अभियंत्रण सेवा (आरईएस) को दिए गए। भुगतान का सिलसिला देर रात तक चलता रहा और कोषागार में कामकाज रात 12 बजे तक जारी रहा।
विज्ञापन


सरकारी अवकाश होने के बावजूद मंगलवार को वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन कोषागार खुला रहा। सुबह 10 बजे से ही अधिकारी और कर्मचारी कार्यालय पहुंच गए थे। दिनभर लंबित बिलों के भुगतान की प्रक्रिया चलती रही। अचानक बढ़े भुगतान के दबाव से विभागों में हलचल रही और अधिकारी-कर्मचारी देर रात तक जुटे रहे। बताया गया कि बजट लैप्स होने से बचाने के लिए विभागों ने तेजी दिखाते हुए अपने बिल कोषागार में प्रस्तुत किए, जिससे सुबह से ही फाइलों का दबाव बढ़ गया।

आरईएस को 21 करोड़ व एनजीटी को मिले 8 करोड़
मुख्य कोषाधिकारी अनिल कुमार मिश्रा ने बताया कि बुंदेलखंड में सड़कों के निर्माण के लिए सबसे अधिक 21 करोड़ रुपये नियोजन विभाग की ओर से आरईएस को दिए गए। इसके अलावा सिंचाई विभाग ने एनजीटी को आठ करोड़ रुपये का भुगतान किया। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने निर्माण कार्यों के लिए आवास विकास को पांच करोड़ रुपये दिए।
विज्ञापन



पीडब्ल्यूडी और सिंचाई विभाग को मिले चार करोड़
वहीं, पीडब्ल्यूडी और सिंचाई विभाग को मिलाकर शासन से करीब चार करोड़ रुपये मिले। मेडिकल कॉलेज ने यूपी प्रोजेक्ट कॉरपोरेशन को साढ़े तीन करोड़ और सीएंडडीएस को तीन करोड़ रुपये दिए। कृषि विभाग ने आधुनिकीकरण के लिए रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय को ढाई करोड़ रुपये दिए, जबकि मेडिकल कॉलेज ने नेशनल मेडिकल काउंसिल को 50 लाख रुपये का भुगतान किया। इसके अलावा चिकित्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और वन विभाग समेत अन्य विभागों में भी करीब साढ़े सात करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।


आखिरी महीने में डेढ़ हजार करोड़ का भुगतान
कोषागार से वित्तीय वर्ष के अंतिम महीने में ही करीब डेढ़ हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। इसमें एक हजार करोड़ रुपये केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत राजस्व विभाग को दिए गए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें