पर्यटन विभाग द्वारा झांसी के ऐतिहासिक स्थलों को देखने के लिए शुरू की गई झांसी दर्शन बस का लाभ पर्यटक लेने लगे हैं। पर्यटक विभाग भी बस के प्रचार- प्रसार में जुटा हैं, ताकि झांसी क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने का उद्देश्य पूरा हो सके।
पर्यटन विभाग ने झांसी के ऐतिहासिक व दर्शनीय स्थलों को तक पर्यटकों को लाने के लिए 27 सितंबर (विश्व पर्यटक दिवस) को 13 सीटर झांसी दर्शन एसी डीलक्स बस की शुरूआत की थी। शुरूआत में पर्यटकों का मिलना मुश्किल हुआ, मगर अब पर्यटक इस सुविधा का लाभ लने लगे हैं। पर्यटक भी इस सेवा से संतुष्ट भी नजर आ रहे है। पर्यटन विभाग भी बस के प्रचार प्रसार में लगातार लगा हुआ है। विभाग ने रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म एक पर स्थित उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग केंद्र पर बस के प्रचार प्रसार के लिए समुचित सामग्री का इंतजाम कर रखा है। अक्तूबर में इस केंद्र पर सत्तर पर्यटकों ने बस के संबंध में जानकारी लेकर इसका लाभ लिया।
पर्यटन विभाग के मैनेजर मुकुल गुप्ता ने बताया कि झांसी दर्शन बस के अभी तक सकारात्मक परिणाम सामने आए है। यात्रा से संबंधित पैम्फलेट छपवाए जा रहे हैं, जिनको शहर में और स्टेशन पर यात्रियों में बंटवाया जाएगा। पर्यटक बस की ऑनलाइन बुकिंग भी कर सकते हैं।
यह है टूर कार्यक्रम
पर्यटन विभाग ने झांसी दर्शन के लिए एक से तीन दिन तक का टूर पैकेज बना रखा है। इसमें पर्यटकों को ओरछा, बरुआसागर, जराय का मठ, झांसी का किला, रानी महल, लाइट एंड साउंड, संत जूड श्राइन चर्च, म्यूजियम, गढ़मऊ झील दिखाए जाते हैं। भारतीयों के लिए एक व्यक्ति का किराया 650 रुपये व विदेशियों के लिए 1200 रुपये निर्धारित है।
स्टेशन पर पार्किंग के लिए मांगी जगह
रेलवे स्टेशन परिसर में जगह आवंटित न होने के कारण झांसी दर्शन बस खड़ी नहीं हो पाती है। इस कारण पर्यटकों को वीरांगना होटल तक जाना पड़ता है। पर्यटन अधिकारी ने सीनियर डीसीएम दुर्गेश दुबे को पत्र लिखकर स्टेशन परिसर में बस को खड़ा करने के लिए जगह की मांग की है। इसी तरह रेलवे स्टेशन पर रोजाना ट्रेनों से आने वाले विदेशी पर्यटकों को खजुराहो व ओरछा भ्रमण कराने के लिए दिल्ली, आगरा, वाराणसी व खजुराहो से बसें आतीं हैं। हर रोज ढाई सौ से तीन सौ टूरिस्ट यहां आते हैं। सात साल पहले तक स्टेशन के सामने पार्किंग के लिए जगह निर्धारित थी। लेकिन, बाद में पार्किंग हटा देने के कारण टूरिस्ट बसें सड़क की दूसरी तरफ खड़ी हो रहीं हैं। विदेशी पर्यटकों को सड़क पार करबस में बैठना पड़ता है।
इन जरूरतों को भी करना होगा पूरा
- झांसी व आसपास के किसी भी दर्शनीय स्थल के पास रिसोर्ट नहीं हैं, जहां विदेशी सैलानियों को एक साथ ठहराया जा सके।
- दर्शनीय स्थलों तक पहुंचने के लिए अच्छी सड़कें नहीं हैं, जबकि मध्य प्रदेश में इस बात का विशेष ध्यान रखा जाता है।
- लग्जरी होटलों की भी कमी हैं, जहां एक साथ डेढ़ सौ से तीन सौ विदेशी पर्यटकों को एक जगह ठहराया जा सकें।
- पर्यटन विभाग को अन्य विभागों का सहयोग नहीं मिल पाता, इस कारण विदेशी सैलानियों को झांसी में ठहराने की कोशिशें आगे नहीं बढ़ पा रही है।
ये भी है कारण
टूर आपरेटर्स ने खजुराहो से लौटते समय पर्यटकों को झांसी का किला व संग्रहालय दिखाना भी रूट चार्ट में शामिल कर रखा है। मगर, इन धरोहरों के आसपास शौचालय, रेस्टारेंट, पार्किंग जैसी सुविधाएं न होने से टूर ऑपरेटर बचते हैं। दूसरा इनको देखने के लिए दो घंटे का समय चाहिए। चूंकि, शताब्दी एक्सप्रेस प्लेटफार्म चार पर आती है। इस कारण प्लेटफार्म तक पहुंचने, लगेज ले जाने व बुक कराने में एक घंटे का समय जाया हो जाता है। इस कारण भी पर्यटक उक्त राष्ट्रीय धरोहरों को देखने से वंचित रह जाते हैं। टूर आपरेटर्स चाहते हैं कि अगर भोपाल से नई दिल्ली जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस प्लेटफार्म एक नंबर पर आने लगे तो पर्यटकों को झांसी घुमाना शुरू कर दिया जाएगा। स्टेशन पर आरपीएफ, जीआरपी व टिकट चेकिंग स्टाफ से मिलने वाले सहयोग से वे प्रसन्न है।