पराली जलाने वाले दस बड़े शहरों में झांसी
झांसी। सुप्रीम कोर्ट एवं एनजीटी की सख्ती के बावजूद फसल अवशेष जलाने के मामले थमने के बजाए बढ़ते जा रहे हैं। सेटेलाइट से हासिल हुई तस्वीरों के जरिए झांसी में अब तक 46 मामले सामने आ चुके हैं। यह संख्या पिछले तीन वर्षों के दौरान सर्वाधिक है। इस मामले में झांसी सूबे के उन बड़े दस जनपदों में भी शुमार हो गया जहां पराली जलाने के सबसे अधिक मामले सामने आए।
धान के खेत काटे जाने के बाद उसके अवशेष खेत में ही पड़े रह जाते हैं। मजदूरी बचाने की खातिर अमूमन किसान पराली खेत में जला देते हैं। इसके धुएं से बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए। इसके बाद सेटेलाइट के जरिए निगरानी शुरू कराई गई। लखनऊ स्थित कृषि विभाग के मॉनीटरिंग सेंटर की रिपोर्ट चौंकाने वाली है। एक अक्तूबर से 11 नवंबर के बीच झांसी में कुल 46 स्थानों पर पराली जलाने की तस्वीरें सामने आईं, जबकि पिछले वर्ष पराली जलाने के महज दो मामले ही सामने आए थे। वहीं, ललितपुर में इसके सात मामले सामने आए हैं।
पराली जलाने के मामले में झांसी वाले सूबे के दस बड़े जनपदों में शुमार है। रिपोर्ट के मुताबिक सबसे अधिक पीलीभीत में 299, रामपुर में 278, मथुरा में 441, खीरी में 126, महाराजगंज में 103 मामले सामने आए हैं। कृषि अधिकारियों का कहना है जांच के बाद दोषी किसानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बारह जगहों पर आज नजर आया धुआं
पराली जलाने से पैदा होने वाला धुआं आज बारह स्थानों पर दिखाई पड़ा। सेटेलाइट इमेज के मुताबिक 11 नवंबर को झांसी में कुल 12 जगहों पर गहरा धुआं दिखाई पड़ा। एस-एनपीपी सेटेलाइट के माध्यम से हासिल इमेज के मुताबिक मोंठ में नौ एवं टहरौली में तीन स्थान मालूम चले हैं।
बुंदेलखंड में पराली जलाने के मामले
हमीरपुर 13
जालौन 56
ललितपुर 5
महोबा 7
सेटेलाइट के माध्यम से जहां से पराली जलाने संबंधी सूचना मिलती है, उसकी रिपोर्ट तहसीलों को भेज दी जाती है। दोषियों से उसके अनुसार जुर्माना वसूला जाता है।
- कमल कटियार, उप कृषि निदेशक