महानगर के कई इलाकों में कटखने कुत्तों से लोग दहशत में हैं। जुलाई में ही एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने वालों के आंकड़े देखें तो रोजाना 25 लोगों को कुत्तों ने काटा है। वहीं, नगर निगम अब तक 48 फीसदी कुत्तों की नसबंदी करा पाया है। निगम के पास कुत्ते काटने की हर महीने औसतन 70 शिकायते भी पहुंच रही हैं। कई जगह कुत्तों के कारण बच्चों को अकेले घर से बाहर नहीं खेलने दे रहे हैं।
महानगर में 26000 आवारा कुत्ते होने का नगर निगम प्रशासन का अनुमान है। बिजौली में नगर नियम का एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर बना हुआ है। यहां पर ही कुत्तों को पकड़कर नसबंदी की जाती है। इसके अलावा एंटी रैबीज टीकाकरण भी होता है। इस सेंटर में एक साथ 80 कुत्ते रह सकते हैं। 5 साल में नगर निगम के पशु कल्याण विभाग को 90 फीसदी आवारा कुत्तों की नसबंदी करने का लक्ष्य मिला हुआ है। पशु कल्याण अधिकारी डॉ. राघवेंद्र सिंह का कहना है कि पिछले दो वर्षों से 12591 कुत्तों की नसबंदी की जा चुकी है।
जुलाई में 750 लोगों को काटा
अगर कहीं से भी एक कुत्ते द्वारा कई लोगों को काटने की शिकायत आती है तो एबीसी सेंटर में लाकर उसकी कई दिनों तक निगरानी भी की जाती है। वहीं, जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. पीके कटियार ने बताया कि जुलाई में करीब 750 लोगों को कुत्तों ने काटा है, इनमें पालतू और आवारा कुत्तों की संख्या लगभग बराबर है। वहीं, जिन्हें कुत्तों ने काटा है, उन्हें एंटी रैबीज वैक्सीन लगाई गई है।
बिना पंजीकरण कुत्ता पालने पर लग सकता दो हजार का जुर्माना
नगर निगम प्रशासन का अनुमान है कि महानगर में पालतू कुत्तों की संख्या कारीब तीन हजार है। इसके सापेक्ष अब तक 1170 ने ही पंजीकरण कराया है। जबकि, पंजीकरण शुल्क मात्र 200 रुपये है। पंजीकरण के दौरान कुत्ता पालने वाले का आधार कार्ड, कुत्ते की फोटो और उसका एंटी रेबीज टीकाकरण कार्ड जमा करना पड़ता है। डॉ. राघवेंद्र का कहना है कि बिना पंजीकरण कुत्ता पालने पर दो हजार रुपये जुर्माना का प्रावधान है।
कृष्णा एन्क्लेव कॉलोनी में कई लोग बने शिकार
इन दिनों कृष्णा एन्क्लेव कॉलोनी में आवारा कुत्तों से लोग परेशान है। कॉलोनी के सुमित द्विवेदी ने बताया कि एक महीने में 10-12 लोगों को कुत्तों ने काटा है। रैन बसेरा से शिव मंदिर के आसपास ये कुत्ते दिनभर घूमते रहते हैं। चाहें दिन हो या रात कोई भी निकले तो काटने दौड़ पड़ते हैं। यहीं के प्रदीप कुशवाहर में बताया कि कॉलोनी में 14-15 कुते हैं। इसमें तीन-चार खूंखार हैं। पिछले महीने उन्हें भी कुत ने काट लिया था। इसके अलावा कॉलोनी निवासी भाग्यचंद, निखिल अग्रवाल समेत दो बच्चों को भी कुते काट चुके हैं। कहा कि घर के बाहर बच्चे खेलते हैं तो परिवार के किसी व्यक्ति को डंडा लेकर गेट पर बैठना पड़ता है।