झांसी की पहली पहचान वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई हैं, जिन्होंने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आजादी का बिगुल फूंका था और स्वराज्य की खातिर फिरंगियों से लोहा लिया था। झांसी की बेटियों का ये जज्बा अब भी कायम है। सीमित संसाधनों में भी बेटियां प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा की चमक बिखेर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर अमर उजाला महानगर की कुछ ऐसी ही बेटियों से रूबरू करा रहा है।
पहली महिला कॉमर्शिलय पायलट बनीं कृतिका
बचपन में हवाई जहाज की आवाज आते ही कृतिका सक्सेना दौड़ पड़तीं थीं उसे देखने के लिए, कभी छत पर तो कभी घर के आंगन में खड़ी होकर उड़ते हुए हवाई जहाज को देखा करती थीं। शुरुआत से ही उनकी आंखों में हवाई जहाज उड़ाने का सपना पल रहा था और अब ये सपना हकीकत में बदल गया है। कृतिका बुंदेलखंड की पहली महिला कॉमर्शिलय पायलट बन चुकी हैं। हाल ही में उनका चयन इंडिगो एयरलाइंस में हुआ है। कंपनी की ओर से अबूधावी में एयर बस - 320 की ट्रेनिंग करके लौटी हैं। कृतिका का कहना है कि सपने हमेशा ऊंचे देखने चाहिए और उन्हें पूरा करने के लिए प्राणपण से लग जाना चाहिए। सफलता मिलकर ही रहेगी।
छोटे पर्दे पर किरदार निभा रहीं शहर की सिमरन
2017 में मिस बुंदेलखंड का खिताब जीतने वालीं ब्रह्मनगर कॉलोनी निवासी सिमरन कौर अब छोटे पर्दे पर किरदार निभाकर झांसी का नाम रोशन कर रही हैं। इसके अलावा वह बॉलीवुड फिल्म श्रीदेवी बंगलो में भी न्यूज एंकर का रोल निभाती हुई नजर आएंगी। इस फिल्म में अरबाज खान और प्रिया प्रकाश मुख्य भूमिका में हैं। सिमरन बताती हैं कि ग्रेजुएशन करने के बाद वह आईएएस की तैयारी कर रही थीं, तभी उनका रुझान एक्टिंग की तरफ हो गया। अब तक वह क्राइम पेट्रोल जैसे चर्चित शो के अलावा मुस्कान और शक्ति सीरियल में काम कर रही है। सावधान इंडिया, क्राइम अलर्ट शो में भी वह अहम किरदार निभा चुकी हैं।
उमा ने एथलेटिक्स में फहराया परचम
पलींदा गांव रक्सा की रहने वालीं उमा भारती राजपूत एथलेटिक्स में लगातार नाम कमा रहीं हैं। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वालीं उमा रोजाना छह घंटे अभ्यास करती हैं। साथ ही पढ़ाई भी उनकी जारी है। उमा ने उत्तर प्रदेश की ओर से कई एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और मेडल जीते हैं। उमा ने बताया कि उन्हें परिवार का पूरा प्रोत्साहन मिलता है। खासतौर पर पिता हर समय उनका संबल बढ़ाते हैं। पिता अभिमान के साथ जब कहते हैं कि मेरी बेटी बेटे से कम नहीं है, तो मैं भी गौरवान्वित होती हूं। उमा का लक्ष्य अंतर्राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी बनना है।
मल्लखंभ में जीता ऋतु ने सोना
देश की प्राचीन खेल विद्या है मल्लखंभ। वर्ष 2019 में महाराष्ट्र के दादर के समर्थ व्यायामशाला में अंतरराष्ट्रीय मल्लखंभ प्रतियोगिता हुई थी, जिसमें झांसी की ऋतु प्रजापति ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीता था। प्रतियोगिता में चीन, अमेरिका और जापान के खिलाड़ियों ने भी प्रतिभाग किया था। ऋतु ने कहा कि आर्थिक कठिनाई उनके सामने आती रही हैं। लेकिन, पिता दीनदयाल और कोच रविप्रकाश ने हमेशा खेलने के लिए प्रोत्साहित किया। ऋतु ने बताया कि ये तो अभी शुरुआत है, आगे उन्हें अपने खेल को और निखारते हुए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर परचम फहराना है।
गायत्री ने नहीं मानी कभी भी हार
झांसी में महिला क्रिकेट के सीमित संसाधनों के बाद भी गायत्री अग्रवाल ने कभी हार नहीं मानी। खूब अभ्यास किया और खेल की बारीकियों पर अपनी पकड़ बनाई। नतीजतन वह उत्तर प्रदेश की टीम में जगह बनाने में सफल रहीं। 2007 में उन्होंने प्रदेश की ओर से खेलने का मौका मिला। इसके अलावा उन्हें वर्ल्ड कप संभावितों की टीम में भी चयनित किया गया था। वर्तमान में वह प्रदेश की महिला क्रिकेट टीम की मैनेजर हैं। गायत्री ने कहा कि समस्याएं तो हर व्यक्ति के जीवन में आती हैं, उनसे घबराना नहीं चाहिए, बल्कि डटकर मुकाबला करना चाहिए।
मेहनत के बूते विश्वमोहिनी ने पाया मुकाम
उत्तर प्रदेश की सीनियर क्रिकेट टीम की ओर से खेल चुकीं झांसी की विश्वमोहिनी मिश्रा का कहना है कि उन्होंने क्रिकेट सीखने में बहुत मेहनत की है। भाई भी क्रिकेट सिखाता था। काफी संघर्ष किया। झांसी में न तो खेल मैदान था और न ही बेहतर प्रशिक्षण की व्यवस्था। लेकिन, इसके बाद भी वह आगे बढ़ने के लिए निरंतर पसीना बहाती रहीं। फिलहाल, आगरा में रेलवे में कार्यरत विश्वमोहिनी रेलवे की ओर से भी क्रिकेट खेलती हैं। विश्वमोहिनी ने बताया कि उन्हें हर कदम पर पिता और भाई का साथ मिला।
सुनीता के जुनून को सभी ने किया सलाम
नेशनल हॉकी खिलाड़ी सुनीता तिवारी वर्तमान में उत्तर प्रदेश विद्यालयीय हॉकी टीम की चयनकर्ता हैं। साथ ही वह स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के तकनीकी ऑफिसर भी हैं। सुनीता उत्तर प्रदेश की टीम की कप्तान भी रह चुकी हैं। सुनीता ने बताया कि शुरुआत में उनके परिवार के लोग नहीं चाहते थे कि खिलाड़ी बनें, लेकिन उनके जुनून के चलते सभी साथ आ गए। सुनीता तिवारी का कहना है कि हॉकी खेलने का रुझान अपने आप हुआ। इससे पहले खो-खो और दौड़ में रुचि थी। हैंडबॉल की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में खेल चुकी हैं। कई बालिकाओं को खेल का प्रशिक्षण दे रही हैं।
यूपी रणजी क्रिकेट टीम की कमान संभाल रही झांसी की बेटी
क्रिकेट को आमतौर पर पुरुषों का खेल कहा जाता है लेकिन शहर की होनहार खिलाड़ी अदिति शर्मा ने इस मिथक को काफी हद तक तोड़ा है। महिला क्रिकेट के क्षेत्र में शहर की प्रतिभावान खिलाड़ी अदिति का कद दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। मौजूदा समय में वह उत्तर प्रदेश रणजी महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हैं। ध्यानचंद स्टेडियम से प्रैक्टिस शुरू करने के बाद वर्ष 2010 में कानपुर में अंडर-19 का ट्रायल दिया तो अदिति का चयन हो गया। देश भर से इंडिया चैलेंजर के लिए बनी तीन टीमों में एक इंडिया ब्लू में भी वह जगह बनाने में कामयाब हो गईं। पिछले साल ही उन्हें यूपी रणजी टीम की कमान मिल गई।
बॉक्सिंग में आराधना जड़ चुकीं ‘गोल्डन पंच’
खातीबाबा निवासी आराधना पटेल बॉक्सिंग खिलाड़ी हैं। 2014 में उन्होंने ध्यानचंद स्टेडियम में प्रैक्टिस शुरू की थी। अब तक वह चार बार सीनियर नेशनल खेल चुकी हैं। केरला में दिसंबर में आयोजित सीनियर वर्ग में प्रतियोगिता में उन्होंने कांस्य पदक जीता। प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में वह चार बार गोल्ड जीत चुकी हैं। 2017 में सीनियर इन्विटेशन नेशनल प्रतियोगिता में भी उन्होंने एक स्वर्ण पदक जीता है। 2015 और 2018 में हुई ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी बॉक्सिंग प्रतियोगिता में उन्होंने कांस्य पदक जीता है। आराधना ने बताया कि उनका अगला लक्ष्य एशिया और वर्ल्ड चैंपियनशिप में प्रतिभाग कर देश के लिए पदक जीतना है।
टीवी कलाकार सिमरन कौर। - फोटो : REPORTERS
महक दीक्षित बाइकर।- फोटो : REPORTERS
आदिति शर्मा क्रिकेटर। - फोटो : REPORTERS
आराधना पटेल। - फोटो : REPORTERS