झांसी। स्वास्थ्य विभाग मानकों को ताक पर रखकर पैथोलॉजी के लाइसेंस बांटता चला गया। एक-दो या तीन नहीं, झांसी में एक डॉक्टर के नाम पर दस-दस पैथोलॉजी सेंटर चल रहे हैं। बड़ा सवाल यह उठता है कि एक समय में डॉक्टर कितनी पैथोलॉजी सेंटरों पर काम देखता होगा? क्या ये डॉक्टर सुपरमैन हैं, जो 24 घंटे किसी न किसी पैथोलॉजी की दौड़ लगाते रहते हैं? इससे स्पष्ट है कि जांचों के नाम पर झांसी में मरीजों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। कई ऐसे मामले भी सामने आ चुके हैं, जिसमें अलग-अलग पैथोलॉजी से जांच कराने पर रिपोर्ट में मामूली नहीं, बल्कि काफी अंतर आया।
जिले में 82 पैथोलॉजी लैब पंजीकृत हैं। मगर किसी डॉक्टर के पंजीकरण नंबर पर सात, किसी के नाम पर आठ तो किसी के नाम पर दस-दस पैथोलॉजी सेंटर चल रहे हैं। हाल ही में जन सूचना अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में यह खुलासा हुआ है। आरटीआई में जानकारी दी गई है कि जिस डॉक्टर के नाम पर आठ पैथोलॉजी चल रही हैं, वो मेडिकल कॉलेज गेट नंबर तीन, टकसाल मुहल्ला, कानुपर मार्ग, सीपरी बाजार मुहल्ले में हैं। जबकि, जिस चिकित्सक के नाम पर नौ पैथोलॉजी चल रही हैं, वो मयूर विहार, मेडिकल कॉलेज गेट नंबर एक के सामने, खातीबाबा मार्ग, हीगन कटरा, कानपुर मार्ग आदि क्षेत्रों में है। वहीं, एक चिकित्सक के नाम पर मेडिकल कॉलेज के सामने तीन, आईटीआई, पिछोर, विश्वविद्यालय पुलिस चौकी के पास, सीपरी बाजार, पैरामेडिकल के पास समेत 10 पैथोलॉजी चल रही हैं। जानकारों के मुताबिक नियमानुसार पैथोलॉजी सेंटर पर डॉक्टर की उपस्थिति का समय लिखना अनिवार्य है। उस समय पैथोलॉजिस्ट को वहां मौजूदा रहना जरूरी होता है। जांच रिपोर्ट पर पैथोलॉजिस्ट के ही हस्ताक्षर होते हैं। अब बड़ा सवाल यह उठता है कि एक पैथोलॉजिस्ट यदि कम से कम दो घंटे एक पैथोलॉजी पर बिता रहा है तो क्या वो 20 घंटे काम कर रहा है? जबकि, पैथोलॉजी पास-पास भी नहीं हैं। जाहिर है कि स्वास्थ्य विभाग ने मानकों को ताक पर रखकर लाइसेंस बांट दिए। न तो मरीजों की सेहत के बारे में सोच गया और न ही नियम-कानून के बारे में। मरीजों से जांच के नाम पर मनमाना पैसा तो खूब वसूला जा रहा है लेकिन उन्हें सभी पैथोलॉजी सेंटरों पर सही रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है।
शहर से लेकर ग्रामीण तक में दे रहे सेवाएं
ऐसा नहीं है कि पैथोलॉजी सेंटर सिर्फ शहर में ही हैं। आरटीआई में यह भी खुलासा हुआ है कि एक डॉक्टर ने तो नगर के अलावा ग्रामीण इलाके की पैथोलॉजी में भी अपना नाम दे दिया है। यदि निष्पक्ष जांच हो जाती है तो इस मामले में कइयों की गर्दन फंस सकती है।
प्रिंटेड या फर्जी हस्ताक्षर हो रहे
हर पैथोलॉजी सेंटर पर पैथोलॉजिस्ट के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठा रहा है कि यदि पैथोलॉजिस्ट सभी सेंटरों पर मौजूद नहीं है तो क्या उसके प्रिंटेड या फर्जी हस्ताक्षर कर मरीजों को रिपोर्ट बांटी जा रही है। ऐसे में तो जो टेक्नीशियन जांच कर देता होगा, उसकी पड़ताल तक कोई करने वाला नहीं है।
मामला गंभीर है। पैथोलॉजी सेंटर खुलने से जुड़े सभी नियमों की पड़ताल कर इसकी जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी मिलता है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। - सुभाषचंद्र शर्मा, मंडलायुक्त।