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झांसी स्टेशन पर वाई फाई सुविधा मार्च से

Wed, 25 Nov 2015 12:43 AM IST
ब्यूरो
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झांसी। उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक अरुण सक्सेना ने कहा कि मार्च 2016 से झांसी स्टेशन पर वाई फाई की सुविधा शुरू हो जाएगी। झांसी-कानपुर रेल मार्ग के दोहरीकरण का काम भी तीन साल की समय सीमा में पूरा हो जाएगा। इस कार्य को छह सेक्शन में पूरा होना है, अभी तीन सेक्शन में काम चल रहा है। अगले साल दो सेक्शन में और कार्य शुरू हो जाएगा। वह मंगलवार की शाम भीमसेन- झांसी रेल खंड का निरीक्षण करने के बाद स्टेशन पर स्थित वीआईपी रूम में पत्रकारों से बात कर रहे थे।
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उन्होंने कहा कि कानपुर- झांसी रेल खंड के प्रमुख स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं में लगातार इजाफा किया जा रहा है।  एट- कोंच शटल का एक और फेरा बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है। भिंड- इटावा रेल लाइन पर सवारी गाड़ियों के सवाल पर उन्होंने कहा कि ट्रैक पूरी तरह तैयार है, मगर मुख्य संरक्षा आयुक्त ने निरीक्षण के दौरान एक पुल के पिलर नंबर छह में दरार पायी थी। उस दरार की समस्या को दिसंबर माह में दूर कर लिया जाएगा।

इसके बाद रेल मंत्रालय को रिपोर्ट भेज दी जाएगी। रेल मंत्रालय से हरी झंडी मिलते ही इस लाइन पर ट्रेनों का संचालन शुरू हो जाएगा। बाद में उन्होंने कोच मरम्मत कारखाने का निरीक्षण किया। इस मौके पर मंडल रेल प्रबंधक एस के अग्रवाल आदि अधिकारी मौजूद थे। इसके पूर्व उन्होंने भीमसेन, झांसी रेल खंड के पामा, लालपुर, उरई, मोंठ आदि स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं का जायजा लिया। कर्मचारियों से सुविधाओं के बारे में पूछताछ की। इस दौरान उन्होंने स्थानीय संगठनों द्वारा उठाई गई मांगों पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
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विदेशी पर्यटकों की समस्या को देखेंगे
पत्रकार वार्ता के दौरान उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक से सवाल किया गया कि शताब्दी एक्सप्रेस के गार्ड ब्रेकवान से सटे लगेजवान में दिल्ली से कोरियर कंपनी के पैकेज भरे रहते हैं, इस कारण आगरा से विदेशी पर्यटकों का लगेज नहीं आ पाता है। बाद में दूसरी ट्रेनों से लगेज को झांसी लाया जाता है। इस दौरान विदेशी पर्यटकों को लगेज आने तक झांसी व ओरछा में ठहरकर समय गुजारना पड़ता है। इस पर उन्होंने कहा कि यह समस्या पहली बार उन्हें बताई गई है, इसे वह देखेंगे।

समझ से परे रही जीएम की जल्दबाजी
भीमसेन- झांसी रेल खंड का निरीक्षण करके लौटे जीएम पहले तो पत्रकारों से वार्ता करने के लिए तैयार नहीं थे, मगर डीआरएम के कहने पर वीआईपी रूम में पांच मिनट देने को तैयार हो गए। पांच मिनट से ज्यादा पत्रकारों से बात नहीं की। गौर करने की बात यह है कि जब वह स्पेशल ट्रेन से झांसी आए हैं तो ट्रेन छूटने की कोई जल्दी नहीं थी। दूसरा, कोच मरम्मत कारखाने में नए कोच को हरी झंडी दिखाने के बाद रेलवे द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में ही उन्हें भाग लेने जाना था। ऐसे में अगर वह पत्रकारों के चंद सवालों के और जवाब दे देते तो आम जनता को जरूर कोई न कोई नई जानकारी या उपलब्धि का पता लगता।
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