झांसी। अमेरिका की फाइजर वैक्सीन बनाने में झांसी की बहू नेहा कोठारी की भी अहम भूमिका रही है। दस सदस्यीय रिसर्च टीम का हिस्सा रहते हुए नेहा ने दिन-रात बिना छुट्टी लिए साल भर तक शोध कार्य जारी रखा। आखिरकार उनकी टीम को सफलता मिल ही गई। उनके पति भी वैज्ञानिक हैं, जो कि तीसरे फेज में चल रही फ्रेंच कंपनी की वैक्सीन का हिस्सा रहे हैं।
गुरसराय निवासी संदीप कोठारी के भाई सुदीप और उनकी पत्नी नेहा पिछले तीन सालों से अमेरिका के न्यूयॉर्क में रह रहे हैं। नई दिल्ली के प्रीत विहार निवासी नेहा तीन साल से फाइजर कंपनी में बतौर सीनियर साइंटिस्ट कार्यरत हैं। जबकि, सुदीप ने तीन दिन पहले ही जॉनसन एंड जॉनसन कंपनी में बतौर निदेशक ज्वाइन किया है। अब तक वो फ्रेंच कंपनी में कार्यरत थे, जो कि कोरोना की वैक्सीन बना रही है। जिसका तीसरे फेज का ट्रायल चल रहा है। संदीप भी वैक्सीन के तीसरे फेज की शुरूआत तक इसका हिस्सा रहे हैं। वहीं, उनकी पत्नी नेहा ने फाइजर वैक्सीन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संदीप ने बताया कि फाइजर वैक्सीन के लिए शुरूआती रिसर्च एक कंपनी ने की थी, इसके बाद तकनीक फाइजर को दे दी गई। नेहा दस सदस्यीय रिसर्च टीम का हिस्सा रहीं। जब सभी विभागों में वर्क फ्रॉम होम चल रहा था, तब वो और उनकी पत्नी रोज ऑफिस जाते थे, ताकि महामारी के इस दौर में लोगों को जल्द से जल्द कोरोना की वैक्सीन मिल सके। उन्होंने बताया कि बिना छुट्टी लिए कोरोना का टीका बनाने में दिन-रात नेहा जुटी रहीं। आखिरकार कंपनी, टीम और नेहा को सफलता मिल ही गई।
टायफाइड, कालरा, निमोनिया की वैक्सीन में निभाई भूमिका
संदीप और नेहा दोनों लगभग दस सालों तक इंटरनेशनल वैक्सीन इंस्टीट्यूट, साउथ कोरिया में कार्यरत रहे। वहां नेहा ने टायफाइड, कोलरा की वैक्सीन बनाने में भी अहम भूमिका निभाई। दोनों ही वैक्सीन को भारत में लाइसेंस मिल चुका है। इसके अलावा निमोनिया की वैक्सीन बनाने में भी उनका रोल रहा है।