कथा में बकासुर वध, कालिया नाग दमन तथा ब्रज-रक्षा के प्रसंगों सहित अनेक दैत्य विनाश की लीलाओं का विस्तार पूर्वक वर्णन हुआ। उन्हेांने बताया कि चौरासी लाख योनियों के बाद मनुष्य जन्म मिलता है, अतः कथा-श्रवण, सत्कर्म और भक्ति द्वारा जीवन को सार्थक बनाना ही सबसे बड़ा पुण्य है। गोवर्धन गिरिराज पूजा प्रसंग में बताया गया कि कृष्ण ने गोवर्धन उठाकर इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों की रक्षा की और अहंकार पर करुणा की विजय स्थापित की।
कथा के दौरान पंडोकर महाराज ने श्रद्धालुओं को अपना आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर इस मौके पर विधायक राजीव सिंह पारीछा, पंजाब सिंह बबीना, देवेंद्र गुप्ता झांसी, उमाशंकर शास्त्री, आनंद गुप्ता कानपुर, नंदू गुप्ता, रिंकू दांगी, बृजराज सिंह, स्वतंत्र गुप्ता, दिनेश पाराशर, मनमोहन गेड़ा, रम्मू नेता, पवन राजपूत, बीर सिंह सितौरा, संजय सिंह, बीर सिंह, अतर सिंह हर्षित, निर्मल दांगी मौजूद रहे। अंत में गुलाब सिंह दांगी ने सभी आगंतुकों तथा संत महात्माओं का स्वागत किया। समापन अवसर पर आयोजक गुलाब सिंह दांगी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। अंत में प्रसाद वितरण के साथ ही कथा का समापन हुआ। रात में भजन संध्या कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया।
भागवत आचार्य पंडित रमाकांत व्यास कथा सुनाते हुए...