श्रीमद् भागवत कथा का गान करते कथा व्यास
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चिरगांव के पहाड़ी बुजुर्ग के पास रायसेनिया बाबा मंदिर चल रही श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन गुरुवार को कथा व्यास रमाकांत व्यास ने धुंधकारी प्रसंग का सार सुनाते हुए माता-पिता की महिमा को धरती पर साक्षात भगवान का स्वरूप बताया।
कथा व्यास ने कहा माता-पिता ही संसार में प्रत्यक्ष देवता हैं। इन्हें कष्ट पहुंचाना जीवन का सबसे बड़ा पाप है। मंदिर न जाएं तो चल जाएगा, कथा न सुनें तो क्षम्य है, भजन-कीर्तन न करें तो भी जीवन कट सकता है, लेकिन यदि आपने माता-पिता की सेवा नहीं की, तो कुछ भी किया हुआ सफल नहीं माना जाएगा। जो संतान माता-पिता को पीड़ा देती है, वह जीवन में कभी वास्तविक सुख प्राप्त नहीं कर सकती।
विधान परिषद उत्तर प्रदेश के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह
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उन्होंने इकलौते पुत्र वाले परिवारों के संदर्भ में कहा कि माता-पिता का उत्तरदायित्व तब और बढ़ जाता है, जब घर में एक ही बच्चा हो। ऐसे बच्चों में बिगड़ने की आशंका अधिक रहती है, इसलिए संस्कारों की बुनियाद मजबूत करना आवश्यक है। यदि बच्चा बचपन में ताश या व्यसनों की ओर झुकने लगे, तो समझिए बिगड़ने की शुरुआत हो चुकी है, इसे समय रहते रोकना अनिवार्य है।
मंच संचालन दुर्गेश महाराज ने किया। मंचसीन संत विश्वभूषण दास जी, कल्याण दास काका जी, वासुदेव जी महाराज खेरापति, साकेत बिहारी दास,रणधीराचार्य रहे। अंत में आरती और प्रसाद वितरण के साथ कथा दिवस का समापन हुआ। आयोजक गुलाब सिंह दांगी ने बताया कि कथा प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से 5 बजे तक जारी रहेगी। इसके साथ ही रात आठ बजे से भजन संध्या का कार्यक्रम होगा। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार विधान परिषद उत्तर प्रदेश के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह, पूर्व एमएलसी श्याम सुंदर सिंह, पूर्व ब्लॉक प्रमुख रामनरेश यादव, हरपाल परमार गुरसराय, दिनेश पाराशर, रघुवीर दिसौरिया, शीतल प्रसाद आदि मौजूद रहे।