वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 4/5 पर शनिवार दोपहर उस समय अफरातफरी मच गई, जब यात्रियों से भरी लिफ्ट अचानक करीब 20 फीट की ऊंचाई पर जाकर रुक गई। लिफ्ट में दो बच्चे, तीन महिलाएं और दो युवक सवार थे, जो बीच रास्ते में फंस गए। गैस कटर से लिफ्ट के दरवाजे काटने के बाद यात्री निकाले गए। इस घटना ने रेलवे स्टेशन पर यात्री सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी।
लिफ्ट के बीच में अटकते ही मची चीख-पुकार
जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब 12:45 बजे प्लेटफार्म नंबर 4/5 स्थित लिफ्ट से यात्री नीचे प्लेटफार्म पर उतर रहे थे। इसी दौरान एक आईटीबीपी कर्मी के बैग की पट्टी लिफ्ट के दरवाजे में फंस गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पट्टी को झटका देकर बाहर निकालने के प्रयास में लिफ्ट का सेंसर प्रभावित हो गया। इसके चलते लिफ्ट ने काम करना बंद कर दिया और कुछ ही क्षणों में वह करीब 20 फीट ऊपर जाकर रुक गई। लिफ्ट के बीच में अटकते ही अंदर मौजूद यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। सीमित जगह और बंद वातावरण के कारण लोगों की सांसें अटकने लगीं। लिफ्ट के फंसने की सूचना तत्काल कंट्रोल रूम को दी गई। सूचना मिलते ही एडीआरएम नंदीश शुक्ला, स्टेशन निदेशक सीमा तिवारी सहित अन्य रेलवे अधिकारी मौके पर पहुंच गए।
एक घंटे तक चला रेस्क्यू
मौके पर रेलवे की तकनीकी टीम को भी बुलाया गया, जिसने लिफ्ट का दरवाजा खोलने की काफी देर तक कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। इस दौरान प्लेटफार्म पर बड़ी संख्या में यात्रियों की भीड़ जुट गई और सभी की निगाहें रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी रहीं। करीब एक घंटे तक चले प्रयासों के बाद भी जब लिफ्ट का दरवाजा नहीं खुल पाया, तो अंततः गैस कटर मंगाया गया। गैस कटर से लिफ्ट का दरवाजा काटा गया, जिसके बाद राहत कार्य शुरू हो सका। सबसे पहले अंदर फंसे दोनों बच्चों को बाहर निकाला गया। इसके बाद एक-एक कर अन्य यात्रियों को सुरक्षित बाहर लाया गया। चूंकि लिफ्ट नीचे नहीं आ सकी थी, इसलिए यात्रियों को सीढ़ी के सहारे नीचे उतारा गया।
अंधेरे और घुटन में बीता एक घंटा, बच्चे रोते रहे
लिफ्ट में फंसे यात्रियों के लिए यह समय बेहद भयावह साबित हुआ। अंदर मौजूद सीपरी बाजार निवासी मंजू ने बताया कि लिफ्ट में लाइट बार-बार जा रही थी, जिससे कई बार पूरा अंधेरा छा जाता था। अंधेरे और बंद माहौल के कारण घुटन बढ़ने लगी। साथ में मौजूद दोनों बच्चे डर के मारे रोने लगे। यात्रियों ने बताया कि मोबाइल फोन भी ठीक से काम नहीं कर रहे थे, जिससे बाहर संपर्क करना मुश्किल हो गया। हर मिनट भारी लग रहा था और लोगों में दहशत बढ़ती जा रही थी। बाहर से आ रही आवाजों से उन्हें उम्मीद बनी रही कि जल्द ही राहत मिलेगी। जब गैस कटर से दरवाजा काटा गया, तब जाकर अंदर फंसे लोगों ने राहत की सांस ली। बाहर निकलते ही अधिकांश यात्री बदहवास हालत में प्लेटफार्म पर इधर-उधर भागने लगे। इस दौरान रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की ओर से यात्रियों को पानी और जलजीरा उपलब्ध कराया गया।
ड्यूटी और ट्रेन छूटी, बढ़ीं मुश्किलें
लिफ्ट में फंसे यात्रियों में काॅमर्शियल विभाग की महिला टीटीई कल्पना गुबरेले और ललिता टिग्गा भी शामिल थीं, जिन्हें ड्यूटी पर जाना था। इसके अलावा सीपरी बाजार निवासी मंजू समेत अन्य यात्री अपनी ट्रेन पकड़ने जा रहे थे। करीब एक घंटे तक लिफ्ट में फंसे रहने के कारण सभी की ट्रेन छूट गई। इस घटना से यात्रियों को न सिर्फ मानसिक तनाव झेलना पड़ा, बल्कि उनकी यात्रा योजनाएं भी प्रभावित हुईं। घटना के दौरान घबराहट के कारण महिला यात्री मंजू की तबीयत बिगड़ गई। बाहर निकालने के बाद उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया, जिसके बाद उनकी हालत सामान्य हुई और उन्हें सुरक्षित रवाना किया गया।
इनका यह है कहना
यात्री के बैग की स्ट्रिप फंस जाने से लिफ्ट बंद हो गई थी। सभी सात लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। यात्री करीब 30 से 40 मिनट तक लिफ्ट में फंसे रहे। -
मनोज कुमार सिंह, पीआरओ, झांसी मंडल
रेस्क्यू के दौरान का वीडियो...