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एक बार फिर होगा झांसी की पुरातत्व सर्वेक्षण

Tue, 07 Jun 2016 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। ऐतिहासिक झांसी नगरी के पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट को लेकर प्रकाशित होने वाली पुस्तक के लिए लोगों को वर्ष 2017 का इंतजार करना पडे़गा। क्योंकि विभाग के अनुसार फिर से नगर क्षेत्र का पुरातत्व सर्वेक्षण किया जाना है। वहीं पूर्व में किए सर्वेक्षण में महानगर में लगभग 8 सौ वर्ष पुराने धर्मस्थल एवं अति प्राचीन बस्ती के प्रमाण मिले हैं।
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गौरतलब है कि ललितपुर, महोबा के प्रत्येक विकास खंड व उनके नगर की पुरातत्व सर्वेक्षण रिपोर्ट पुस्तक के रूप में प्रकाशित हो चुकी है, लेकिन प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का केंद्र रहा रानी लक्ष्मी बाई की एतिहासिक नगरी की पुरातत्व सर्वेक्षण रिपोर्ट आज तक प्रकाशित नहीं हो पाई है। जबकि विभाग संपूर्ण नगर का पुरातत्व सर्वेक्षण कर चुका है।

हालांकि इस संदर्भ में विभाग के अनुसार नगर क्षेत्र का सर्वेक्षण वर्ष 2010 में पूर्ण हुआ। वहीं झांसी नगरी का एक बार फिर पुरातत्व सर्वेक्षण किया जाएगा। पुरातत्व वेता बुद्ध काल से चंदेल काल तक के बीच झांसी नगर का क्या स्वरूप था, क्या जनजीवन था पर लगातार शोध कर रहे है।
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किले में मिला था चंदेल कालीन शिलालेख
झांसी नगर का अस्तित्व सैकड़ों वर्ष पुराना माना जाता है। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डा. एसके दुबे के मुताबिक नगर के किले में चंदेल शासन में निर्मित लगभग 800 वर्ष पुराने मंदिर के पुरा अवशेष मिले थे, जिनमें 12 वीं शताब्दी का शिलालेख है। इसमें चंदेल राजाओं के नाम अंकित है।

ढाई हजार वर्ष पुरानी बस्ती के मिले प्रमाण
नगर क्षेत्र के सर्वेक्षण में कई चौंकाने वाले ऐतिहासिक तथ्य उभरे। क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी के मुताबिक वर्तमान नगर का अस्तित्व आज से लगभग ढाई हजार वर्ष पुराना मिला है। पैरा मेडिकल के समीपवर्ती खेतों में क्षेत्र की सबसे पहली बस्ती के प्रमाण मिले हैं। यहां से बुद्ध काल से पूर्व में प्रचलित मिट्टी के बर्तन व अवशेष प्राप्त हुए हैं।
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