झांसी। उत्तर प्रदेश में महाराष्ट्र की प्राचीन खेल विद्या मल्लखंभ को झांसी के खिलाड़ी जीवंत किए हुए है। प्रदेश में इस खेल के 130 खिलाड़ी हैं, जिनमें सर्वाधिक 65 खिलाड़ी झांसी के हैं। यही नहीं, झांसी में तीन राष्ट्रीय एवं दो आमंत्रण प्रतियोगिताएं भी हो चुकी हैं। जबकि शैलेश सहगल ने उत्तर प्रदेश सरकार से इस खेल में लक्ष्मण पुरस्कार प्राप्त किया हुआ है।
महाराष्ट्र के नासिक, अमरावती, दादर, वाराणसी, कानपुर से सफर करता हुआ मल्लखंभ 17 - 18 वीं शताब्दी में मराठाओं के साथ झांसी आया। सन 1933 में श्री लक्ष्मी व्यायाम मंदिर में इस खेल का प्रचलन तेजी से शुरू हुआ। युवाओं में रुचि बढ़ी और इसमें प्रशिक्षित खिलाड़ियों ने कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी छाप छोड़ी। इनमें अनिल पटेल, रवि प्रकाश परिहार, हरी शंकर कुशवाहा, केशव कुमार, पवन कुमार, बालिकाओं में आरती त्रिपाठी, नाजमी खान, भारती कुशवाहा, शकुंतला परिहार, नीलू परिहार, भारती पटैरिया, दीपशिखा कुशवाहा व ज्योति चौहान आदि है। राष्ट्रीय मल्लखंभ फेडरेशन आफ इंडिया के टेक्निकल कमेटी के चेयरमैन अनिल पटेल के मुताबिक मल्लखंभ खेल विभाग से मान्यता प्राप्त है। पुलिस तथा आर्मी की भर्ती में इसके खिलाड़ियों को वरीयता दी जाती है। इस खेल में भी कैरियर की संभावनाएं तेजी से बढ़ी है। उनके अनुसार प्रदेश में मल्लखंभ के सर्वाधिक खिलाड़ी 65 झांसी में है। जो लक्ष्मी व्यायाम मंदिर, न्यू ईरा पब्लिक स्कूल, ब्लू बैल्स व सरस्वती बालिका विद्या मंदिर कालेज में अभ्यास करते हैं। झांसी में वर्ष 84, 91 और वर्ष 2000 -2001 में राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं हुई थी।
पारंपरिक खेल है मल्लखंभ
मलखंभ भारत का एक पारंपरिक खेल है, जिसमें खिलाड़ी लकड़ी के एक खंबे अथवा रस्सी पर तरह - तरह के करतब दिखाते है और कई रोमांचक आसन एकल में तथा अन्य साथियों के साथ बनाते है। इनमें पिरामिड, मयूरासन आदि है। कई खिलाड़ी बोतल पर भी मल्लखंभ का प्रदर्शन करते हैं।