नगर निगम में शनिवार को मेयर के सामने ही सत्ताधारी दल के दो पार्षदों में तकरार हो गई। कार्यकारिणी चुनाव में भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी रहीं रितिका तिवारी ने अपनी हार के लिए पार्टी के कुछ पार्षदों पर भितरघात का आरोप लगाते हुए उनके निष्कासन की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि पिछली बार पार्टी नेताओं ने उनसे नामांकन वापस करा लिया था, लेकिन इस बार बागियों को मनाने की कोशिश क्यों नहीं की गई। वहीं, नगर निगम कार्यकारिणी चुनाव में भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी की हार के बाद संगठन ने जांच बैठा दी है। पार्टी के पार्षद दल के नेता नरेंद्र नामदेव और सचेतक मुकेश सोनी को जांच की जिम्मेदारी दी गई है। दोनों से तीन दिन में बिंदुवार रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट के आधार पर पार्टी से बगावत और क्रॉस वोटिंग करने वाले पार्षदों पर कार्रवाई हो सकती है।
कार्यकारिणी चुनाव में भाजपा की रणनीति बागी प्रत्याशी की जीत से बिगड़ गई। प्रत्याशियों के चयन से लेकर चुनाव परिणाम तक को लेकर पार्टी के भीतर नाराजगी है। कुछ पार्षद टिकट कटने के पीछे जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं तो कुछ बागियों को चुनाव से पहले न मनाए जाने को लेकर वरिष्ठ नेताओं पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
विदाई समारोह के बाद मेयर कक्ष में बहस
नगर निगम में नगर आयुक्त आकांक्षा राणा का विदाई समारोह था। कार्यक्रम खत्म होने के बाद महापौर बिहारी लाल आर्य अपने कक्ष में पहुंचे तो कई पार्षद भी वहां पहुंच गए। इसी दौरान रितिका तिवारी ने कार्यकारिणी चुनाव में हार का मुद्दा उठाया और पार्टी के भीतर भितरघात करने वालों पर कार्रवाई की मांग की। रितिका ने कहा कि पिछले साल हुए कार्यकारिणी चुनाव में उन्हें प्रत्याशी नहीं बनाया गया था। इसके बाद उन्होंने नामांकन दाखिल किया तो पार्टी के जनप्रतिनिधियों ने उनसे नामांकन वापस लेने को कहा। पार्टी नेताओं के निर्देश पर उन्होंने नामांकन वापस ले लिया था। इसके बावजूद मतदान हुआ और भाजपा के सभी पांच अधिकृत प्रत्याशी चुनाव जीत गए थे।
नैनवानी से हुई बहस, वोट अपने पक्ष में डलवाने का आरोप
रितिका ने इस बार भी बगावत की स्थिति बनने का जिक्र करते हुए बिना नाम लिए एक जनप्रतिनिधि की भूमिका पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि इस बार बागियों को समय रहते मना लिया जाता तो पार्टी प्रत्याशी को हार का सामना नहीं करना पड़ता। इसी दौरान कार्यकारिणी सदस्य चुने गए सुनील नैनवानी से उनकी बहस हो गई। रितिका ने आरोप लगाया कि उनके कुछ मतदाताओं के वोट नैनवानी के पक्ष में डलवाए गए। नैनवानी ने आरोप से इन्कार करते हुए कहा कि उन्हें चुनाव में तय नौ मतदाताओं ने ही वोट दिए हैं और उनका इसमें कोई दोष नहीं है। विवाद बढ़ने पर महापौर ने आश्वासन दिया कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
‘पार्टी का विरोध करने वालों का निष्कासन हो’
रितिका तिवारी ने कहा कि वह पार्टी की अनुशासित कार्यकर्ता हैं, लेकिन कार्यकारिणी चुनाव में पार्टी का विरोध करने वालों का निष्कासन होना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने।
नैनवानी बोले- किसी के वोट नहीं बदलवाए
सुनील नैनवानी ने कहा कि उन्होंने न तो किसी प्रत्याशी की सूची में मतदाताओं के नाम बदलवाए और न ही दूसरे प्रत्याशी के मतदाताओं के वोट अपने पक्ष में डलवाए। मेयर कक्ष में उन्होंने रितिका तिवारी के सभी सवालों का जवाब दिया। उनके अनुसार, बाद में रितिका और उनके पति उनके जवाब से संतुष्ट हो गए।
दो सदस्यीय जांच समिति गठित
बृहस्पतिवार को हुए कार्यकारिणी चुनाव में भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी रितिका तिवारी के खिलाफ पार्टी की ही पार्षद नीता यादव ने बगावत कर चुनाव लड़ा था। नीता यादव को 10 वोट मिले और उन्होंने जीत दर्ज की, जबकि रितिका तिवारी को छह वोट ही मिल सके। चुनाव में भाजपा के सात पार्षदों के क्रॉस वोटिंग करने की बात सामने आई थी।
हार के बाद रितिका तिवारी ने शुक्रवार को महानगर अध्यक्ष सुधीर सिंह को शिकायती पत्र देकर मामले की जांच कराने की मांग की थी। उन्होंने चार पार्षदों के नाम भी दिए थे, जिनकी भूमिका संदिग्ध बताई गई थी। शनिवार को महानगर अध्यक्ष ने दो सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी। समिति से यह पता लगाने को कहा गया है कि पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी को किन कारणों से हार का सामना करना पड़ा और इसमें किन-किन पार्षदों की भूमिका रही। जांच रिपोर्ट तीन दिन में मांगी गई है। रिपोर्ट आने के बाद संगठन आगे की कार्रवाई तय करेगा।