झांसी। झांसी में इस वर्ष मानसून के शुरुआती दो महीने बेहद फीके रहे। जून और जुलाई को मिलाकर महज 133.7 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो पिछले 23 वर्षों में सबसे कम है। इससे पहले वर्ष 2002 में इन दोनों महीनों में केवल 69.8 मिलीमीटर वर्षा हुई थी। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगस्त में अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान समेत खरीफ फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
जनपद में 15 जून से 15 सितंबर तक मानसून का मौसम माना जाता है। इस वर्ष मानसून की दस्तक भी देर से हुई। जून में केवल 17.26 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। जुलाई की शुरुआत में जरूर राहत मिली और पहले 11 दिनों में 75.9 मिलीमीटर वर्षा हुई, लेकिन इसके बाद मानसून फिर कमजोर पड़ गया। अगले 20 दिनों में केवल 40.58 मिलीमीटर बारिश हुई। पूरे जुलाई में 12 दिन ऐसे रहे, जब एक बूंद भी बारिश नहीं हुई। नतीजतन जुलाई का कुल वर्षा आंकड़ा 116.48 मिलीमीटर पर सिमट गया।
अगस्त की शुरुआत में बादल तो छा रहे हैं, लेकिन फिलहाल हल्की बूंदाबांदी ही हो रही है। सोमवार को भी दोपहर बाद हल्की बारिश हुई, जिससे उमस और बढ़ गई। लोग झमाझम बारिश का इंतजार कर रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र, भरारी के मौसम वैज्ञानिक डॉ. आदित्य कुमार सिंह ने बताया कि अल नीनो के प्रभाव से मानसून देर से आया और अब तक सामान्य से कम बारिश हुई है। इसका असर धान की फसल पर पड़ सकता है। हालांकि, बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र बनने से मंगलवार से मौसम में बदलाव की संभावना है। सात अगस्त तक अच्छी बारिश के आसार हैं।
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25 वर्षों में सिर्फ 10 बार पार हुआ औसत वर्षा का आंकड़ा
कृषि विभाग के अनुसार, जिले में जून में औसतन 79.24 और जुलाई में 195.01 मिलीमीटर, यानी दोनों महीनों में कुल 274.25 मिलीमीटर बारिश सामान्य मानी जाती है। वर्ष 2002 से अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो केवल 10 वर्षों—2003, 2005, 2008, 2010, 2011, 2012, 2013, 2016, 2018 और 2025—में ही जून-जुलाई की कुल वर्षा सामान्य औसत से अधिक रही है।
कब-कितनी बारिश हुई
वर्ष वर्षा
2002 69.8
2003 359.0
2004 201.8
2005 279.3
2006 213.8
2007 161.7
2008 538.1
2009 178.2
2010 277.7
2011 552.9
2012 329.4
2013 507.0
2014 186.8
2015 241.4
2016 299.1
2017 235.2
2018 331.4
2019 181.0
2020 191.1
2021 208.3
2022 154.4
2023 251.5
2024 160.4
2025 472.4