एक तरफ देश की लाइफ लाइन कही जाने वाली भारतीय रेलवे आधुनिकता के नए कीर्तिमान गढ़ रही है, तो दूसरी तरफ इसी व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले रेल कर्मचारियों का परिवार आवासीय कालोनी में डर के साए में जीने को मजबूर है। बदहाली का आलम यह है कि जर्जर हो चुके रेलवे क्वार्टरों की दीवारें में नमीं आ गई हैं। आसमान से बरसती बूंदें छत को चीरकर कमरों में टपक रही हैं। दुर्दशा के बीच अपने आशियाने को बचाने की लाचारी और किसी अनहोनी का खौफ इन परिवारों की रातों की नींद छीन चुका है। अफसोसजनक है कि कर्मचारियों की आवाज और उनके बच्चों के डर पर जिम्मेदार रेल विभाग ने पूरी तरह से खामोशी की चादर ओढ़ रखी है। इनकी हर शिकायत व हर गुहार प्रशासनिक उदासीनता की फाइलों में कैद हो चुकी है।
रानी लक्ष्मी नगर रेलवे कालोनी में वर्तमान में करीब 1603 आवास है। जिन्हें रेलवे में काम करने वाले कर्मचारियों को आवंटित है। आरबी-एक, आरबी-दो और आरबी-तीन टाइप आवास के अलावा बंगलों का निर्माण कराया गया है। वर्षों से बने आवासों में समय से मरम्मत व पुताई न होने से जर्जर व बदरंग हो चुके हैं। बारिश के बाद छतों से पानी टपकने से दीवारों में नमी व दुर्गंध से घर के अंदर रखा सामान खराब हो रहा है। वहीं समय से मरम्मत व सफाई न होने से कालोनी के पीछे बनी नालियां उखड़ गई है। साफ-सफाई न होने से सांप-बिच्छु जैसे जहरीले जानवरों का डर बना रहता है। यही नहीं नालियों से उठने वाली बदबू से लोग परेशान है। कर्मियों की माने तो करीब पांच साल से मरम्मत कार्य नहीं हुए है। पेंट कराने के बाद दीवारों पर नमी से दुर्गंध बनी रहती है। शिकायत करने पर आईओडब्ल्यू छतों पर पॉलीथिन डलवा देते है। वहीं घर के अंदर दरवाजें, फर्श व नालियां टूटी पड़ी है।
यह कहना है कर्मचारियों का
आरबी-1 के आवास नंबर 738 एच में रहने वाले सूरज कहना है कि उनके आवास में पिछले कई वर्षों से पानी की समस्या है। 15 से 20 मिनट तक नल से पानी आता है। बारिश में छत लीकेज की समस्यां बनीं रहती है।
आरबी-2 के आवास नंबर 602/ए में रहने वाले अमित वर्मा ने बताया कि मकान के चारों तरफ फैंसिंग न होने से आवारा जानवर घुस आते है। कई बार लिखित व ऑनलाइन शिकायत के बाद भी फैंसिंग नहीं कराई गई। छत टपकने पर पॉलीथिन डालकर काम चलाना पड़ता है।
आरबी-2 के आवास नंबर 601/बी में रहने वाले हेल्पर दीपक यादव ने बताया कि पिछले पांच साल से छत लीकेज बनीं हुई है। केमिकल और पॉलीथिन डालने के बाद भी बारिश में पानी टपकता रहता है। मकान में लगे लकड़ी के गेटों में दीमक लगने से खराब पड़े है।
एनसीआरएमयू के कालोनी केयर कमेटी सदस्य नीरज त्रिपाठी ने आवासीय समस्याओं को अफसरों संग बैठक कर रखा जाता है। झाड़ियाें के जंगलनुमा आकार लेने से चोरी की घटनाओं का अंदेशा रहता है। आवासीय छतों के टपकना बड़ा मुद्दा है। अफसरों ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही टेंडर कर समस्याओं का निस्तारण कराया जाएगा।
इनका यह है कहना
पीआरओ मनोज कुमार सिंह ने बताया कि रेलवे आवासीय कालोनी की समय-समय पर रंगाई-पुताई के साथ मरम्मत कार्य कराया जाता है। रेलवे ने बारिश को लेकर योजना तैयार किया है। आवासीय छतों के लीकेज सुधारने के लिए ठेके पर काम दिया जाएगा।