अब वायरल बुखार पांच से सात दिन नहीं बल्कि 10-15 दिन में ठीक हो रहा है। यही नहीं, किसी को निमोनिया हो रहा है तो किसी की प्लेटलेट्स कम हो रही है। मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन की ओपीडी में सोमवार को 70 फीसदी से ज्यादा रोगी बुखार के आए। रोजाना प्लेटलेट्स कम होने के औसतन 12 तो निमोनिया के 15 रोगियों को भर्ती किया जा रहा है। वहीं, ब्लड बैंक से भर्ती रोगियों को औसतन 20 आरडीपी (रेडम डोनर प्लेटलेट्स) जारी हो रही है। मौसम के तेजी से बदलने की वजह से वायरल संक्रमण पनप रहा है, जिसकी चपेट में आकर लोग बुखार-खांसी की चपेट में आ रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जकी सिद्दीकी ने बताया कि बुखार के साथ खांसी को तीन दिन हो जाए तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं। यह निमोनिया का प्रारंभिक लक्षण है। वायरल बुखार में प्लेटलेट्स कम हो रही है, ऐसे रोगियों को भर्ती किया जा रहा है। वहीं, मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. एमएल आर्या का कहना है कि प्लेटलेट्स की डिमांड बढ़ी है। पर्याप्त मात्रा में प्लेटलेट्स, खून आदि उपलब्ध हैं।
यह सावधानी बरतेंमे
मुंह पर रूमाल रखकर खांसी, हाथ मिलने से परहेज करें। धूल की जगह पर जाने से बचें अन्यथा तेज खांसी होगी। निमोनिया होने पर धूल से सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।