रोडवेज बसों में सफर के दौरान यात्री की तबीयत बिगड़ने या चोट लगने पर तत्काल प्राथमिक उपचार के लिए फर्स्ट एड बॉक्स लगाए गए हैं, लेकिन कई बसों में यही सुरक्षा व्यवस्था बदहाल है। झांसी बस स्टैंड पर खड़ी एक बस में फर्स्ट एड बॉक्स की फिटिंग और बंद करने की व्यवस्था क्षतिग्रस्त मिली। बॉक्स के हिस्से लटकते हुए मिले। कुछ बसों की खिड़कियों के कांच टूटे मिले।
झांसी महानगर से प्रतिदिन करीब 146 बसों का विभिन्न मार्गों पर संचालन होता है। इन बसों में फर्स्ट एड बॉक्स लगाए गए हैं, लेकिन इनके रखरखाव की स्थिति पर ध्यान कम नजर आता है। जिस बॉक्स का इस्तेमाल चोट लगने या अचानक तबीयत बिगड़ने पर होना चाहिए, वही बस में सुरक्षित तरीके से लगा नहीं मिली।
झटके में टूटकर गिर सकता है बॉक्स
बुधवार को संवाददाता की पड़ताल के दाैरान यूपी 93 बीटी 1702 में फर्स्ट एड बॉक्स अपनी निर्धारित जगह पर पूरी तरह सुरक्षित नजर नहीं आया। इसकी फिटिंग क्षतिग्रस्त है और कुछ हिस्से लटकते हुए मिले। बस के ब्रेक लगाने, गड्ढे में जाने या तेज झटके की स्थिति में बॉक्स के और क्षतिग्रस्त होने या गिरने की आशंका है।
खिड़की के टूटे कांच से परेशानी
बस नंबर यूपी 78 एलएन 6841 की खिड़की का कांच टूटा मिला। खिड़की के क्षतिग्रस्त हिस्से से सफर के दौरान धूल और धुआं अंदर आने की परेशानी होती है। अचानक ब्रेक लगने या दुर्घटना की स्थिति में टूटे हिस्से यात्रियों के लिए चोट का कारण बन सकते हैं।
जरूरत के वक्त ही काम आता फर्स्ट एड
बस में दुर्घटना, चोट या अचानक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर फर्स्ट एड बॉक्स तत्काल राहत का पहला साधन होता है। ऐसे में बॉक्स का सही हालत में और आसानी से उपलब्ध होना जरूरी है। इस किट में ड्रेसिंग पैड, बैंडेज, कॉटन, एंटीसेप्टिक, दस्ताने, ओआरएस आदि का होना जरूरी है।
जांच व्यवस्था पर भी सवाल
रोडवेज बसों को संचालन में भेजने से पहले उनकी तकनीकी और सुरक्षा संबंधी जांच की जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या निरीक्षण के दौरान फर्स्ट एड बॉक्स की फिटिंग, स्थिति और उसमें उपलब्ध प्राथमिक उपचार सामग्री भी जांची जाती है। यदि जांच होती है तो क्षतिग्रस्त बॉक्स बस में कैसे रह गया।
यह बोले डिपो प्रभारी
फर्स्ट एड बॉक्स चोरी या तोड़े जाने की घटनाओं के बाद परिचालकों को ड्यूटी पर जाने से पहले डिपो से बॉक्स उपलब्ध कराए जाते हैं। बस वापस आने पर इन्हें सुरक्षित जमा कराया जाता है। क्षतिग्रस्त फर्स्ट एड बॉक्स की जांच कराकर उन्हें ठीक कराया जाएगा। - प्रतीक सोनी, डिपो प्रभारी