जिला क्षय रोग विभाग में कोरोना का टीका लगाया गया। अमर उजाला
झांसी। जिले में 74.25 फीसदी डॉक्टरों, कर्मचारियों ने कोरोना की वैक्सीन लगवाई। पिछली बार से टीकाकरण का प्रतिशत बढ़ने की वजह से झांसी रेड जोन से बाहर निकलकर येलो जोन में पहुंच गया। बृहस्पतिवार को 2443 डॉक्टरों, स्वास्थ्य कर्मियों ने राहत का टीका लगवाया। अब शुक्रवार को 15 स्थानों पर 25 सत्र में टीकाकरण होगा।
कोरोना की वैक्सीन के लिए बृहस्पतिवार को 12 कोविड सेंटर बनाए गए थे। इन सभी केंद्रों को मिलाकर कुल 31 सत्र स्थल बनाए गए थे। पैरामेडिकल कॉलेज में सर्वाधिक सात और जिला क्षय रोग नियंत्रण इकाई में सबसे कम यानी एक ही सत्र स्थल था। इन सभी केंद्रों को मिलाकर 3290 डॉक्टरों, कर्मचारियों को कोरोना की वैक्सीन लगनी थी। झांसी में लक्ष्य के सापेक्ष 2443 यानी 74.25 प्रतिशत लाभार्थियों को कोरोना का टीका लगाया।
शुरुआती दो दिवसों को मिलाकर झांसी में 2459 के सापेक्ष 1442 को ही वैक्सीन लगी थी, जो कि 59 फीसदी था। ऐसे में झांसी रेड जोन में आ गया था। शासन भी इसको लेकर काफी गंभीर था। कम टीकाकरण के कारण खोजकर इसे दुरुस्त कराने के निर्देश दिए गए थे। बृहस्पतिवार को अच्छा खासा टीकाकरण होने के बाद अब झांसी में तीन दिवसों को मिलाकर लक्ष्य के सापेक्ष लगभग 67 फीसदी वैक्सीनेशन हो चुका है। ऐसे में झांसी अब येलो जोन में आ गया है।
किसी का मेसेज किसी के पास पहुंचा
कोरोना टीकाकरण के लिए तैयार की गई सूची में भी काफी खामियां समाने आई हैं। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज समेत स्वास्थ्य इकाइयों के लाभार्थियों के टीकाकरण का संदेश किसी का किसी और के पास पहुंच रहा है। ऐसे में लाभार्थियों में भी भ्रम की स्थिति बनी रही। कुछ अधिकारियों ने कहा कि कम टीकाकरण के पीछे का यह भी कारण रहा है। इसमें सुधार किया जा रहा है।
टीम को प्रोत्साहित करने के लिए पहले लगवाया टीका
एंबुलेंस सेवा के मंडल प्रभारी दिनेश सिंह ने एंबुलेंस कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए सबसे पहले टीका लगवाया। उन्होंने बताया कि एंबुलेंस के कुछ कर्मचारी वैक्सीन लगवाने से डर रहे थे। इसलिए सबसे पहले खुद टीका लगवाया। फिर सबसे भी लगवाने के लिए कहा।