झांसी-मानिकपुर ट्रैक पर इलेक्ट्रिक इंजन से दौडे़ंगी ट्रेनें
झांसी। झांसी-मानिकपुर रेलवे ट्रैक पर विद्युतीकरण का काम पूरा कर लिया गया है। सात अक्तूबर से इस ट्रैक पर इलेक्ट्रिक इंजन की मदद से गाड़ियों का संचालन शुरू हो जाएगा। अभी विगत 20 अगस्त से झांसी-बांदा पैसेंजर का संचालन इलेक्ट्रिक इंजन से किया जा रहा था।
निजामुद्दीन से मानिकपुर जाने वाली 12448 यूपी संपर्क क्रांति में सात अक्तूबर और मानिकपुर से निजामुद्दीन जोन वाली 12447 यूपी संपर्क क्रांति आठ अक्तूबर से इलेक्ट्रिक इंजन लगेगा। इसी तरह, सप्ताह में तीन दिन चलने वाली 12175 हावड़ा ग्वालियर चंबल एक्सप्रेस में आठ अक्तूबर व 12176 ग्वालियर हावड़ा चंबल एक्सप्रेस में दस अक्तूबर, साप्ताहिक गाड़ी 12177 हावड़ा मथुरा एक्सप्रेस में 11 अक्तूबर व 12178 मथुरा हावड़ा एक्सप्रेस में 14 अक्तूबर से इलेक्ट्रिक इंजन लगेगा।
मालूम हो कि विद्युत ऊर्जा पर्यावरण संरक्षण में सहायक होती है। इसके उपयोग से कार्बन के उत्सर्जन में कमी के साथ विभिन्न प्रकार के प्रदूषण भी कम होते हैं। साथ ही इस ट्रैक के विद्युतीकरण से रेलवे को सालाना करोड़ों रुपये के ईंधन मद की बचत होगी।
यह भी जानिए
अभी झांसी से मानिकपुर तक सिंगल ट्रैक है। अभी तक विद्युतीकरण न होने से डीजल इंजन से ट्रेनें चलाई जाती थीं। इस ट्रैक पर प्रतिदिन अप और डाउन की 25 सवारी और इतनी संख्या में मालगाड़ी दौड़ती हैं। झांसी-खैरार-मानिकपुर और भीमसेन-खैरार स्टेशनों के बीच सिंगल ट्रैक पर 408 किलोमीटर पर विद्युतीकरण काम किया गया है।
ये ट्रेनें दौड़ती हैं
झांसी-मानिकपुर ट्रैक पर प्रमुख रूप से यूपी संपर्क क्रांति, महाकौशल एक्सप्रेस, बुंदेलखंड एक्सप्रेस, तुलसी एक्सप्रेस, चंबल एक्सप्रेस, उदयपुर-खजुराहो एक्सप्रेस, झांसी-इलाहाबाद पैसेंजर, झांसी-बांदा पैसेंजर, झांसी-मानिकपुर पैसेंजर ट्रेनें दौड़ती हैं।
यह भी है तैयारी
रेलवे ने विद्युतीकरण का काम पूरा होने के बाद कानपुर से भीमसेन, भीमसेन से खैरार, खैरार से झांसी और खैरार से मानिकपुर इलाहाबाद की तरफ इस ट्रैक को मालभाड़ा गलियारा के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। चूंकि, अभी कानपुर से झांसी की तरफ मालगाड़ियां लाई जाती हैं, लेकिन इस ट्रैक पर सवारी गाड़ियों की संख्या अधिक होने के कारण मालगाड़ियों को निकालने में वक्त लगता है। जल्द ही, मालगाड़ियों को भीमसेन से खैरार और खैरार से झांसी तक लाया जाएगा। इससे मालगाड़ियों की संख्या में तो इजाफा होगा। साथ ही, इस रूट पर पड़ने वाले प्रमुख स्टेशनों से जुड़े बुंदेलखंड के व्यापारियों को दूसरे शहरों तक माल निर्यात करने में आसानी हो सकेगी।