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धन्यवाद! आपके हर वोट से बज गया डंका

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aprajita 100 miliun smiles - फोटो : amarujala
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झांसी। आप सभी मतदाताओं के उत्साह ने झांसी - ललितपुर संसदीय क्षेत्र का पूरे प्रदेश में डंका बजवाया है। राज्य की 80 लोकसभा सीटों में हम मतदान में चौथे स्थान पर रहे हैं। जबकि, पश्चिमी क्षेत्र को छोड़ दिया जाए तो शेष प्रदेश में हमने पहला स्थान पाया है। वहीं, प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं में महरौनी प्रदेश में अव्वल रही है। लोकतंत्र के महापर्व में मौसम के तल्ख तेवरों को चुनौती देते हुए आपने जो उत्साह दिखाया है, उसके लिए कोटी - कोटी धन्यवाद।

ख़ास आपके लिए:- लोकसभा चुनाव नतीजे: आपके शहर में कौन आगे, कौन पीछे...पल-पल का हाल सीधे आपके मोबाइल पर

लोकसभा चुनाव की मतदान प्रक्रिया रविवार को पूरी हो गई। इसके साथ ही मतदान की स्थिति स्पष्ट हो गई है। इसमें प्रदेश की 80 सीटों में से झांसी - ललितपुर संसदीय क्षेत्र 67.57 मतदान प्रतिशत के साथ टॉप फाइव में जगह बनाने में कामयाब रहा है। खास बात ये है कि टॉप फाइव की अन्य चार सीटों में सभी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की हैं, जिनमें पहले स्थान पर अमरोहा (71.04), दूसरे पर सहारनपुर (70.82), तीसरे पर मुजफ्फरनगर (68.22) और पांचवें स्थान पर कैराना (67.46) रहा है। जबकि, शेष उत्तर प्रदेश में झांसी अव्वल है।
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इतना ही नहीं, मतदान की जिलावार रैंकिंग में संसदीय क्षेत्र का ललितपुर जनपद 72.51 प्रतिशत मतदान के साथ प्रदेश के सभी 75 जिलों में अव्वल रहा है। इसके अलावा एक और रिकॉर्ड और झांसी - ललितपुर संसदीय क्षेत्र के मतदाताओं के नाम रहा है। क्षेत्र की महरौनी विधानसभा में प्रदेश की सभी 403 विधानसभाओं में सर्वाधिक वोटिंग 75.34 प्रतिशत रही है।
जबकि, मतदान से पूर्व मौसम के तल्ख तेवरों को देखते हुए कम मतदान होने की आशंका जताई जा रही थी। लेकिन, मतदाताओं ने 43 डिग्री से अधिक के तापमान को चुनौती देने के अंदाज में पूरे उत्साह के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग कर लोकतंत्र के इस महापर्व में आहुति दी।
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‘आधी आबादी’ का खूब मिला साथ
लोकसभा चुनाव के मतदान में महिला मतदाताओं ने बढ़चढ़ कर अपने मताधिकार का प्रयोग किया। संसदीय क्षेत्र की 9,60,554 महिला मतदाताओं में से 6,33,447 ने अपना वोट डाला। महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 65.95 प्रतिशत रहा। वहीं, 10,79,122 मतदाताओं में से 69.02 प्रतिशत यानी 7,44,828 ने वोटिंग की।  

चर्चित सीटें भी रह गईं पीछे
झांसी संसदीय क्षेत्र से प्रदेश की तमाम चर्चित सीटें भी कहीं पीछे रह गईं। राज्य की राजधानी लखनऊ में महज 53.53 प्रतिशत मतदान हुआ। जबकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीट वाराणसी में 57.81 प्रतिशत मतदाता ही वोट डालने पहुंचे। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की सीट अमेठी में मतदान का आंकड़ा 54.05 प्रतिशत पर पहुंच कर थम गया। कानपुर लोकसभा क्षेत्र भी 51.48 प्रतिशत से आगे नहीं बढ़ पाया।

जनतंत्र में आस्था और सरकार से अपेक्षा
राजनीति विज्ञान के अनुसार अच्छा मतदान लोकतंत्र की बेहतरी के लिए शुभ संकेत है। बुंदेलखंड महाविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. राजबहादुर मौर्य के अनुसार मतदान में रुचि से साबित होता है कि लोगों को जनतंत्र में पूरी आस्था है। साथ ही क्षेत्र की ज्यादातर आबादी वंचित वर्ग से है। खासतौर पर ललितपुर का ज्यादा हिस्सा ग्रामीण है। लोगों की वहां सरकार से ज्यादा अपेक्षाएं हैं। यही वजह कि क्षेत्र के लोगों ने अपनी बेहतरी के लिए अपने मताधिकार का बढ़- चढ़ कर प्रयोग किया।

मतदान के प्रति मतदाताओं को लगातार जागरूक किया गया। व्यवस्था ऐसी की गई कि शहर से लेकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के मतदाता भी अपने मताधिकार का निर्भीक होकर प्रयोग कर सकें। उन्हें मतदान केंद्रों पर बेहतर सहूलियतें मिलीं। जो पहले वोट डालकर आए, उन्होंने दूसरों को भी प्रेरित किया। इसी का नतीजा है कि मतदान में क्षेत्र के मतदाता आगे रहे।
- शिवसहाय अवस्थी, जिलाधिकारी - झांसी

मतदाता जागरूकता को लगातार कार्यक्रम चलाए गए, जिनके माध्यम से ज्यादा से ज्यादा मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित किया गया। मतदाताओं ने भी अपने वोट के महत्व पहचाना और लोकतंत्र के महापर्व में पूरे उत्साह के साथ आहुति दी। ये कीर्तिमान उन मतदाताओं के नाम रहा है, जो भीषण गर्मी के बावजूद अपना वोट डालने मतदान केंद्रों तक पहुंचे।
- मानवेंद्र सिंह, जिलाधिकारी - ललितपुर

‘अपराजिता’ की मुहिम का भी असर
अमर उजाला के नारी गरिमा के साझा संकल्प ‘अपराजिता: 100 मिलियन स्माइल्स’ के तहत मतदाताओं को मतदान के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से लगातार मुहिम चलाई गई। कहीं, मतदान की शपथ दिलाई गई, तो कहीं रैली निकाली गई। सिलसिलेवार ढंग से कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनके माध्यम से समाज के हर वर्ग को जोड़ने का काम किया गया। इस मुहिम को सराहते हुए निर्वाचन आयोग की ओर से शील्ड व प्रमाण पत्र दिया गया। इसके अलावा निर्वाचन आयोग की स्वीप योजना के तहत भी लगातार जागरूकता वाले कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे।
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